लंग कैंसर डे: बढ़ते मामलों के बीच भारत में समय रहते पहचान और रोकथाम की पुकार

मुज़फ़्फ़रनगर हर साल लंग कैंसर डे विश्व स्तर पर लोगों को इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक करने का एक अहम अवसर प्रदान करता है। भारत जैसे विकासशील देश में इस दिन का विशेष महत्व है, जहां फेफड़ों का कैंसर पुरुषों में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुका है। चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के बावजूद लंग कैंसर की भयावहता कम नहीं हुई है, और इसका सबसे बड़ा कारण बीमारी का देर से पता लगना है।भारत में यह पुरुषों में दूसरा सबसे आम कैंसर है और कुल कैंसर से होने वाली मौतों में इसका योगदान करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आंकड़े यह भी बताते हैं कि करीब 70% मामलों में मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब कैंसर तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुका होता है। इस स्थिति में इलाज की संभावनाएं काफी सीमित हो जाती हैं और मरीज की जीवन रक्षा मुश्किल हो जाती है।नोएडा स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर, डॉ. एस एम शोएब ज़ैदी ने बताया कि फेफड़ों के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण तंबाकू का सेवन है। देश में लगभग 26.7 करोड़ लोग तंबाकू के किसी किसी रूप का सेवन करते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी और गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों का प्रचलन बहुत अधिक है। इसके साथ ही अब एक नया और चिंताजनक ट्रेंड यह भी सामने रहा है कि गैरधूम्रपान करने वालों में, खासकर शहरी महिलाओं में भी लंग कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बढ़ोतरी बायोमास ईंधन, सेकेंड हैंड स्मोक और शहरी वायु प्रदूषण जैसे कारणों से हो रही है।अंतरराष्ट्रीय शोधों से यह सिद्ध हो चुका है कि लोडोज सीटी स्कैन के माध्यम से लंग कैंसर की शुरुआती अवस्था में ही पहचान की जा सकती है, जिससे मरीज की जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन दुर्भाग्यवश, भारत में अब तक लंग कैंसर को लेकर कोई राष्ट्रीय स्क्रीनिंग कार्यक्रम मौजूद नहीं है। इसके अलावा, आम लोगों में भी इसके लक्षणोंजैसे कि लगातार खांसी, खून के साथ बलगम आना,अचानक वजन घटना या सीने में दर्दको लेकर जागरूकता बेहद कम है।डॉ. ज़ैदी ने यह भी बताया कि हमें अब तंबाकू नियंत्रण कानूनों को और सख्ती से लागू करना होगा। इसके साथ ही, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत डॉक्टरों को लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण पहचानने के लिए प्रशिक्षित करना जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वह हाईरिस्क समूहों, विशेष रूप से शहरी गरीब आबादी में, नियमित जांच और स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे।लंग कैंसर डे सिर्फ एक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह चेतावनी है कि समय रहते यदि हम जागरूक नहीं हुए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। रोकथाम, समय पर जांच और सही जानकारी ही इस खतरनाक बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार बन सकती है।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts