योगी राज में असुरक्षित महसूस कर रहा एक परिवार, इंसाफ की तलाश में कोर्ट के चक्कर

मुजफ्फरनगर, सिखेड़ा गांव।पुलिस की कार्रवाई और दबाव से परेशान एक गरीब दुकानदार यूसुफ ने अपने मकान पर ‘पलायन कर रहा हूं’ का बोर्ड लगाकर प्रशासनिक तंत्र के प्रति गहरी नाराज़गी जताई है। यह घटना पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गई है

यूसुफ का कहना है कि वह बीते 20 वर्षों से अपने घर के रास्ते पर एक खोखे के जरिये छोटा व्यवसाय कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता रहा है। 4 अप्रैल 2025 को नसीमा नामक महिला द्वारा उसके खोखे को अवैध बताते हुए शिकायत दी गई थी। इस पर तत्कालीन एसडीएम सुबोध कुमार ने मौके का निरीक्षण कर खोखे को वैध मानते हुए थोड़ा पीछे हटाने के निर्देश दिए थे, जिससे मामला शांत हो गया था।

लेकिन 21 अप्रैल को सिखेड़ा थाने के इंस्पेक्टर विनोद कुमार और नायब तहसीलदार बृजेश कुमार पुलिस बल के साथ पहुंचे और बिना किसी कोर्ट आदेश के खोखा हटवा दिया। पीड़ित का आरोप है कि इस दौरान महिलाओं के साथ अभद्रता की गई और उसका सामान ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर जब्त कर लिया गया।

यूसुफ ने इंसाफ की उम्मीद में कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन पुलिस द्वारा उस पर दबाव बनाया जाने लगा कि वह मुकदमा वापस ले ले, वरना उसे झूठे केस में फंसा दिया जाएगा या जान से मारने की धमकी दी गई। यूसुफ का कहना है कि उसे ट्रक से कुचलवाने तक की धमकी दी गई।

डर और असुरक्षा की भावना से घिरे यूसुफ ने आखिरकार अपने घर पर “पलायन कर रहा हूं” का बोर्ड लगाकर यह साफ कर दिया कि वह खुद को इस शासन व्यवस्था में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा। यूसुफ को ग्राम प्रधान का भी समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने उसकी दुकान को वैध बताते हुए लिखित में पुष्टि दी है।

पीड़ित का कहना है कि
“प्रदेश में योगी सरकार होते हुए भी मुझे और मेरे परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं। अब यदि इंसाफ नहीं मिला तो मुझे सच में अपना गांव छोड़ना पड़ेगा।”

यह मामला सिर्फ एक दुकानदार की पीड़ा नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन के दमनात्मक रवैये के खिलाफ एक गूंगी चीख है, जो संविधान और नागरिक अधिकारों की दुहाई देती है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है और क्या वाकई यूसुफ को इंसाफ मिल पाएगा, या वह गांव छोड़ने को मजबूर हो जाएगा।

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