मुजफ्फरनगर। शहर में उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार और उसकी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल देखने को मिली। आलमी योम-ए-उर्दू (विश्व उर्दू दिवस) के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले हारुन ठेकेदार (सिसोली वालों) को सम्मानित किया। यह आयोजन 9 नवंबर को आयोजित हुआ, जो उर्दू के महान शायर और दार्शनिक अल्लामा इकबाल की जयंती के रूप में हर वर्ष मनाया जाता है।
कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि हारुन ठेकेदार ने न केवल सामाजिक कार्यों में बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे लगातार ग्रामीण इलाकों में शिक्षा को बढ़ावा देने और जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करने का कार्य करते रहे हैं। सिसोली सहित आसपास के क्षेत्रों में उन्होंने अनेक सामाजिक पहलें शुरू कीं, जिनका उद्देश्य समाज को शिक्षित और सशक्त बनाना है।
सम्मान प्राप्त करने के बाद हारुन ठेकेदार ने उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “उर्दू भाषा केवल एक भाषा नहीं, बल्कि यह मोहब्बत, इंसानियत और सद्भावना का पैगाम देने वाली ज़ुबान है।” उन्होंने कहा कि उर्दू का रिश्ता केवल साहित्य या शायरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी भाईचारे और एकता का सेतु भी है। उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम में मौजूद शिक्षाविदों और साहित्यप्रेमियों ने भी उर्दू की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भाषा हमारी साझा संस्कृति की आत्मा है। उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन द्वारा किया गया यह सम्मान समाज में उन लोगों के प्रयासों को सराहने का एक सुंदर उदाहरण है, जो भाषाई और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं।
हारुन ठेकेदार की पहलें विशेष रूप से सिसोली और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत रही हैं। वे समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनके इन प्रयासों को देखते हुए उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन द्वारा दिया गया सम्मान न केवल एक व्यक्ति का गौरव बढ़ाता है, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद, साहित्यकार और समाजसेवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन उर्दू भाषा की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी में इसके प्रति रुचि विकसित करने के संकल्प के साथ किया गया। विश्व उर्दू दिवस पर आयोजित यह समारोह न केवल सम्मान का प्रतीक रहा, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया कि भाषाएं समाज के बीच संवाद, प्रेम और एकता की सबसे सशक्त कड़ी होती हैं।















