राजगढ़ (अलवर) में शरद ऋतु की शुरुआत नई फसलों और अनाज के आगमन के साथ हो गई है। इस अवसर पर कस्बे की धर्म सेवा समिति की ओर से मालाखेड़ा गेट कुम्हार मोहल्ले के समीप भव्य अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया। अन्नकूट महोत्सव धार्मिक परंपरा के साथ-साथ समाज में मेल-जोल और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन चुका है।समिति के धर्म प्रेमियों ने बताया कि इस आयोजन के लिए नगर के विभिन्न मठों और मंदिरों में छप्पन भोग तैयार किया गया। अनेक भट्टिया और हलवाई मिलकर भगवान के लिए विशेष भोग तैयार करते हैं, जिसमें मूंग, मोठ, बाजरा, खड़ी, चावल, मिक्स सब्जी और अन्य पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। सुबह भगवान का अभिषेक और अनुपम श्रृंगार किया गया, इसके बाद छप्पन भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं को पंगत में प्रसादी ग्रहण कराई गई।
अन्नकूट महोत्सव में न केवल स्थानीय लोग, बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों से भी लोग बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। आयोजन स्थल पर भक्तों की बड़ी भीड़ रही और हर कोई श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण करता नजर आया। आयोजन के दौरान बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने मिलकर इस पर्व का आनंद उठाया।समिति के सदस्यों ने बताया कि अन्नकूट महोत्सव का उद्देश्य लोगों में धार्मिक भावना को जागृत करना, समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना है। साथ ही यह कार्यक्रम नई फसलों के आगमन और कृषकों के लिए आभार प्रकट करने का भी माध्यम है। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिससे महोत्सव में उत्सव का रंग और भी बढ़ गया।
देर सांय तक चले इस महोत्सव में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाया। इस भव्य आयोजन ने राजगढ़ की संस्कृति और परंपरा को और अधिक उजागर किया है। अन्नकूट महोत्सव अब केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक मेल-जोल और समुदाय के बीच भाईचारे का प्रतीक बन चुका है।इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने आयोजकों की सराहना की और कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं। इस महोत्सव ने सभी के चेहरों पर खुशी और उल्लास भर दिया, जिससे यह परंपरा आने वाले वर्षों में और भी भव्य तरीके से जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।















