महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र और सरकारी नीतियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पटोले ने कहा कि वर्तमान सरकार बैलेट पेपर से चुनाव कराने से डरती है और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए सत्ता में बने रहना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को जनता नहीं बल्कि चुनाव आयोग हराने का काम कर रहा है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नाना पटोले ने कहा कि यदि सरकार और चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता पर भरोसा है तो बैलेट पेपर से चुनाव कराने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जानती है कि बैलेट पेपर से चुनाव हुए तो सच्चाई सामने आ जाएगी और जनता का असली जनादेश उजागर होगा। इसी डर के कारण सरकार ईवीएम प्रणाली पर अड़ी हुई है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
पटोले ने ‘शहरी नक्सल’ शब्द को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह शब्द सरकार का एक राजनीतिक हथियार बन चुका है, जिसका इस्तेमाल असहमति जताने वालों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को डराने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार जो भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसे किसी न किसी तरह से बदनाम करने की कोशिश की जाती है, ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाया जा सके।
कांग्रेस नेता ने बीजेपी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों में बैठे लोग सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं और सरकारी एजेंसियों के जरिए विपक्षी दलों पर दबाव बनाया जा रहा है। पटोले के अनुसार यह राजनीति डर और दबाव पर आधारित है, न कि विकास और जनकल्याण पर। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सरकार लगातार नए विवाद खड़े कर रही है।
नाना पटोले ने यह भी स्पष्ट किया कि बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो कांग्रेस उद्धव ठाकरे के साथ भी राजनीतिक गठबंधन कर सकती है। उनका कहना था कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने की है।
पटोले ने जनता से अपील की कि वह सरकार की नीतियों, चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने कहा कि जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक सत्ताधारी दल अपने फायदे के लिए सिस्टम का दुरुपयोग करता रहेगा। कांग्रेस नेता के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस शुरू हो गई है, और आने वाले समय में यह मुद्दा और भी गरमा सकता है।















