उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के क्रियान्वयन को एक वर्ष पूरा हो चुका है और इस अवधि में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए अब तक पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। खास बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर आवेदन आने के बावजूद निजता उल्लंघन से जुड़ी एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार द्वारा नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर किया गया दावा व्यवहारिक रूप से भी पूरी तरह सफल रहा है।यूसीसी के अंतर्गत सभी आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रिया के माध्यम से किए जा रहे हैं। इस व्यवस्था में आवेदक को किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न ही किसी अधिकारी या कर्मचारी से प्रत्यक्ष संपर्क करना होता है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित तरीके से संपन्न होती है, जिससे किसी भी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक होने या निजी जानकारी लीक होने का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है। डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत तकनीकी व्यवस्था अपनाई गई है, जिससे आवेदकों का भरोसा लगातार बढ़ा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी के एक साल पूरे होने पर कहा कि शुरुआत में कुछ लोगों ने इसे लेकर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की थी। आशंकाएं जताई गई थीं कि इससे नागरिकों की निजता प्रभावित हो सकती है और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, लेकिन बीते एक साल के अनुभव ने इन सभी आशंकाओं को निराधार साबित कर दिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार यूसीसी ने न केवल निजता की शत प्रतिशत रक्षा की है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन का भी मजबूत उदाहरण पेश किया है।
प्रदेशभर में यूसीसी के अंतर्गत सेवाओं को जिस सरलता और सहजता से लागू किया गया है, वह आम जनता के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोग समान रूप से इस प्रणाली का उपयोग कर पा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज अपलोड और स्थिति की ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं ने प्रक्रिया को आसान बना दिया है। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी न्यूनतम हुई हैं।राज्य सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष पर बोझ डालना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार देना है। एक समान प्रक्रिया होने से कानूनी अस्पष्टता कम हुई है और लोगों को अपने अधिकारों और दायित्वों की स्पष्ट जानकारी मिल रही है। यही कारण है कि लगातार आवेदनों की संख्या बढ़ रही है और जनता का विश्वास मजबूत हो रहा है।कुल मिलाकर, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का पहला साल प्रशासनिक सुधार, डिजिटल सुशासन और निजता संरक्षण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में सरकार इसे और अधिक मजबूत और नागरिकों के अनुकूल बनाने की दिशा में काम करने की बात भी कह रही है।
हर डाटा सुरक्षित और गोपनीय
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के तहत लगभग शत प्रतिशत आवेदन यूसीसी पोर्टल के जरिए हो रहे हैं. इसमें आवेदक घर बैठे ही किसी भी सेवा के लिए आवेदन कर सकता है. इस तरह उन्हें किसी भी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की जरूरत नहीं है.पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए मजबूत सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं, यहां तक कि ऑनलाइन आवेदन यदि एक बार सक्षम स्तर के अधिकारी स्तर से मंजूर हो गया तो फिर, संबंधित अधिकारी भी आवेदन की निजी जानकारी नहीं देख पाता है.
केवल आवेदक ही देख सकता है अपना डाटा
आवेदन के साथ प्रस्तुत की गई निजी जानकारी तक सिर्फ आवेदक की ही पहुंच है, जो जरूरी वैरिफिकेशन प्रक्रिया के जरिए इसे देख सकता है. यही कारण है कि बीते एक साल में निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत नहीं आई है. जबकि अब लोग विवाह पंजीकरण के साथ ही विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव इन पंजीकरण से लेकर लिव इन रिश्ते समाप्त करने तक के लिए यूसीसी प्रावधानों का प्रयोग कर रहे हैं. दूसरी तरफ औसत पांच दिन में प्रमाणपत्र मिलने से लोगों का समय भी बच रहा है.















