मुजफ्फरनगर के राजवंश इंटर कॉलेज में छात्राओं को सुरक्षा, अधिकारों और सहायता तंत्र की जानकारी देने के उद्देश्य से एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय पॉक्सो अधिनियम और उससे संबंधित प्रावधान रहे, जिनकी जानकारी विशेषज्ञों ने छात्राओं को विस्तार से दी। कार्यक्रम में बीना शर्मा, मिशन शक्ति की कोऑर्डिनेटर, नीरज गौतम, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के कोऑर्डिनेटर तथा हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन का विशेष सहयोग रहा। इन सभी ने बालिकाओं से संवाद स्थापित करते हुए उन्हें यह बताया कि बदलते समय में स्वयं की सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना कितना आवश्यक है।कार्यक्रम में छात्राओं को विस्तारपूर्वक समझाया गया कि पॉक्सो अधिनियम किन परिस्थितियों में लागू होता है और यह अधिनियम बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करने के लिए किस प्रकार मददगार है। उन्हें यह भी बताया गया कि यदि कभी किसी बालिका को असुरक्षा की स्थिति का सामना करना पड़े तो उसे किस प्रकार साहसपूर्वक आगे आकर अपनी बात रखनी चाहिए और तत्काल उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों व सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए। छात्राओं को 1090 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्डलाइन, पुलिस सहायता नंबर तथा अन्य जरूरी संपर्क साधनों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई।बीना शर्मा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर बालिका को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी स्थिति में चुप न रहकर अपनी बात परिवार, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों के सामने रखनी चाहिए। वहीं नीरज गौतम ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षित और जागरूक बालिका ही समाज की प्रगति का आधार बन सकती है।इस अवसर पर कॉलेज की छात्राओं ने भी खुलकर अपनी शंकाएं और अनुभव साझा किए। उन्हें बताया गया कि आत्मरक्षा के कुछ सरल उपायों को सीखना, सतर्क रहना और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में त्वरित कदम उठाना उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज में सुरक्षित माहौल बनाने के लिए केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज के प्रत्येक व्यक्ति की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।कॉलेज के प्रिंसिपल समुंदर सैन के सहयोग से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से छात्राओं में आत्मविश्वास पैदा होता है और वे निर्भीक होकर अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सकती हैं।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना, उन्हें कानून और सहायता तंत्र के प्रति जागरूक करना तथा समाज में सुरक्षित वातावरण के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रेरित करना रहा। इस जागरूकता अभियान से छात्राओं को न केवल नई जानकारी प्राप्त हुई, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति सजगता भी बढ़ी।















