BARC का फर्जी वैज्ञानिक गिरफ्तार: 40 बार विदेश यात्रा कर जुटाए करोड़ों, मुंबई क्राइम ब्रांच का बड़ा खुलासा

मुंबई। मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) का वैज्ञानिक बताकर न केवल लोगों को गुमराह किया, बल्कि इसी झूठी पहचान के सहारे देश-विदेश में करोड़ों रुपये का फंड भी जुटाया। आरोपी की पहचान फिलहाल गुप्त रखी गई है, लेकिन जांच में यह सामने आया है कि वह पिछले कई वर्षों से खुद को ‘वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक’ बताकर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सरकारी प्रतिनिधि के रूप में शामिल होता रहा।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र और सरकारी मोहरों का इस्तेमाल कर खुद को एक उच्च पदस्थ वैज्ञानिक के रूप में पेश किया। इस फर्जी पहचान के दम पर उसने अब तक 40 बार विभिन्न देशों की यात्राएं कीं, जिनमें अमेरिका, जर्मनी, सिंगापुर, दुबई, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड जैसे देश शामिल हैं। विदेश यात्राओं के दौरान आरोपी ने खुद को भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग से जुड़ा अधिकारी बताकर कई कार्यक्रमों में भाग लिया और वहां ‘संवेदनशील प्रोजेक्ट्स’ से जुड़ी चर्चाओं में हिस्सा लिया।जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया और पेशेवर प्लेटफॉर्म्स पर भी खुद को BARC वैज्ञानिक के रूप में प्रस्तुत किया। उसने कई नामी उद्योगपतियों और वैज्ञानिक संस्थानों से करोड़ों रुपये की धनराशि “संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट” और “परमाणु ऊर्जा सुरक्षा फंड” के नाम पर जुटाई। कई कंपनियों ने उसके झांसे में आकर निवेश किया, यह सोचकर कि वह भारत सरकार के किसी विशेष मिशन से जुड़ा है।

मुंबई क्राइम ब्रांच ने जब आरोपी की पृष्ठभूमि की गहराई से जांच की, तो खुलासा हुआ कि उसके पास न तो कोई वैज्ञानिक डिग्री है और न ही वह कभी किसी सरकारी संस्था में कार्यरत रहा है। आरोपी ने अपने दस्तावेज तैयार करने के लिए उन्नत फर्जीवाड़ा तकनीक का इस्तेमाल किया था। अधिकारियों ने उसके पास से कई फर्जी पहचान पत्र, पासपोर्ट, लैपटॉप, विदेशी मुद्रा और BARC के नाम पर बने लेटरहेड्स बरामद किए हैं।प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपने प्रभावशाली नेटवर्क का इस्तेमाल कर विदेश यात्राओं में ‘सरकारी प्रतिनिधि’ का दर्जा हासिल किया, जिससे उसे वीआईपी ट्रीटमेंट और इमिग्रेशन में विशेष सुविधाएं मिलती थीं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या उसने किसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने या उसे साझा करने की कोशिश की थी।

मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मामला केवल आर्थिक ठगी का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर अपराध है। आरोपी के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (फर्जी दस्तावेज बनाना) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया गया है।पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि आरोपी के संपर्क कई देशों में फैले हुए हैं और कुछ लोग उसके नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उससे पूछताछ जारी है।

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