शतक तो नहीं लगा लेकिन बना दिया 10000 रन वाला वर्ल्ड रिकॉर्ड

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर और उप-कप्तान स्मृति मंधाना के बल्ले से आखिर रनों की बारिश हो ही गई. हाल ही में वर्ल्ड कप जीतने के बाद खुशियों के सातवें आसमान पर बैठीं स्मृति को निजी जीवन की दिल तोड़ने वाली उथल-पुथल का भी सामना करना पड़ा. इन सब हालातों से जूझते हुए मैदान पर लौटीं मंधाना की वापसी अच्छी नहीं रही थी लेकिन आखिरकार श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने अपना ‘रन मशीन’ वाला रूप दिखा दिया और इंटरनेशनल क्रिकेट में 10 हजार रन पूरे करते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर और उप-कप्तान स्मृति मंधाना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी मुश्किल हालात में ही सबसे बड़ी वापसी करते हैं। हाल ही में वर्ल्ड कप जीतने के बाद जहां पूरी टीम जश्न के मूड में थी, वहीं स्मृति का निजी जीवन उथल-पुथल से गुजर रहा था। भावनात्मक दबाव, उम्मीदों का बोझ और मैदान पर लगातार खराब प्रदर्शन—इन सबने उनके खेल पर असर डाला। वर्ल्ड कप के बाद जब वह इंटरनेशनल क्रिकेट में लौटीं तो शुरुआती पारियों में वह अपनी पहचान के मुताबिक लय में नहीं दिखीं। आलोचकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए और फैंस को भी उस बड़ी पारी का इंतजार था, जिसके लिए मंधाना जानी जाती हैं।

श्रीलंका के खिलाफ मुकाबला स्मृति मंधाना के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस मैच में उन्होंने न सिर्फ शानदार बल्लेबाजी की, बल्कि अपने पुराने ‘रन मशीन’ अवतार की झलक भी दिखाई। क्रीज पर उतरते ही उनका आत्मविश्वास साफ नजर आ रहा था। कवर ड्राइव, पुल शॉट और स्ट्रेट ड्राइव—हर शॉट में क्लास और टाइमिंग दिखी। श्रीलंकाई गेंदबाजों के लिए वह किसी चुनौती से कम नहीं रहीं। दबाव भरे माहौल में खेलते हुए उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया।

इस पारी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि स्मृति मंधाना ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने 10 हजार रन पूरे किए। इसके साथ ही उन्होंने एक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। महिला क्रिकेट में इतनी तेजी से इस मुकाम तक पहुंचना उनकी निरंतरता और फिटनेस का प्रमाण है। टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट में रन बनाते हुए उन्होंने खुद को मौजूदा दौर की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल कर लिया है। यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष, मानसिक मजबूती और समर्पण की कहानी भी बयां करती है।

मैच के बाद टीम के ड्रेसिंग रूम में खुशी का माहौल था। साथी खिलाड़ियों ने उनकी इस उपलब्धि को टीम के लिए प्रेरणादायक बताया। कोचिंग स्टाफ का मानना है कि स्मृति की यह पारी आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय टीम को आत्मविश्वास देगी। उप-कप्तान के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सिर्फ रन बनाना ही नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों को दिशा दिखाना भी है, और इस पारी से उन्होंने वह भूमिका बखूबी निभाई।

स्मृति मंधाना की यह वापसी यह संदेश देती है कि निजी जीवन की परेशानियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मैदान पर उसका जवाब दिया जा सकता है। श्रीलंका के खिलाफ खेली गई यह पारी सिर्फ एक मैच विनिंग प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक चैंपियन खिलाड़ी के जज्बे की मिसाल है। अब फैंस को उम्मीद है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में स्मृति का बल्ला इसी तरह रन उगलता रहेगा।

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