मुजफ्फरनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अत्यंत चिंताजनक स्तर 400 तक पहुँचने के गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए मंत्री कपिल देव ने लखनऊ स्थित अपने शासकीय आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण विभाग के सदस्य सचिव संजीव कुमार सिंह मौजूद रहे, जिन्हें मुजफ्फरनगर की वर्तमान प्रदूषित वायु स्थिति से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया।बैठक के दौरान मंत्री कपिल देव ने कहा कि बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा और गंभीर असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। शहर के नागरिकों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, एलर्जी, अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग को निर्देश दिए कि मुजफ्फरनगर में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों की गहन समीक्षा की जाए। इसमें औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल, पराली या कचरा जलाने की घटनाएं, वाहनों से निकलने वाला धुआं और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों की विस्तृत जांच शामिल हो। उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केवल दीर्घकालिक नहीं, बल्कि तात्कालिक और प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
सदस्य सचिव संजीव कुमार सिंह को निर्देशित किया गया कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक सुदृढ़ और त्वरित कार्ययोजना तैयार की जाए तथा उसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके अंतर्गत प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सख्त निगरानी, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, धूल नियंत्रण के उपाय, खुले में कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध और जन जागरूकता अभियानों को तेज करने के निर्देश दिए गए।
मंत्री कपिल देव ने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, ताकि प्रयासों में कोई कमी न रह जाए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग इस स्थिति की तात्कालिकता को समझते हुए अविलंब प्रभावी कदम उठाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि मुजफ्फरनगर के नागरिकों को जल्द से जल्द स्वच्छ और सुरक्षित वायु उपलब्ध कराई जा सके, जिससे उनका स्वास्थ्य और जीवन स्तर बेहतर हो सके।















