मुजफ्फरनगर। शहर की मशहूर दरगाह-ए-आलिया बाबुल हवाइज में शुक्रवार को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में अमारी का जुलूस बड़े अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। इस मौके पर हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपने जज़्बात का इज़हार किया। प्रोग्राम की शुरुआत तिलावत-ए-कुरान से हुई जिसे डॉ. हसन मेहंदी ने अंजाम दिया। इसके बाद अली शाह ज़ैदी ने मरसिये पढ़े जिनसे पूरा माहौल ग़मगीन हो गया। मजलिस को आली जनाब मौलाना फसी हैदर ने खिताब किया। उन्होंने अपनी ख़िताबत में कर्बला के दर्दनाक वाक़िआत बयान करते हुए बताया कि इमाम हुसैन को शहीद करने के बाद उनके घराने को दो साल तक कैद में रखा गया और उन पर ढाए गए जुल्मो-सितम ने इंसानियत को हमेशा के लिए झकझोर कर रख दिया। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत इंसाफ और सच्चाई की राह पर सब्र व इस्तिकामत का बेमिसाल पैगाम है।
प्रोग्राम में ज़ीशान अली ने बताया कि कर्बला की जंग के बाद जब इमाम हुसैन का घराना मदीने वापस लौटा तो उनके पास कुछ ही ऊंट थे जिन पर बीबियां सवार थीं। यह काफिला लंबा सफर तय करते हुए ज़ख्मों से चूर होकर मदीने पहुंचा। उन्हीं की याद में दरगाह-ए-आलिया से उंटों की ज़ियारत और ज़ुलजनाह की सवारी निकाली गई, जिसे देखकर लोग ग़मगीन हो उठे और हर आंख अश्कबार हो गई। अमारी के जुलूस में शामिल लोगों ने मातम करते हुए इमाम हुसैन और उनके घराने की मजलूमियत को याद किया।
इस मौके पर दरगाह-ए-आलिया कमेटी ने शानदार इंतजाम किए। कमेटी के अध्यक्ष सरताज हुसैन, उपाध्यक्ष हाजी ज़फर अब्बास, महासचिव आस मोहम्मद, सचिव रिजवान जाफर, प्रो पेकेंडा सचिव डॉ. हसन मेहंदी, खजांची अकबर अब्बास, ऑडिटर मोहम्मद हाशिम, मेंबर ज़हीर हसन, नासिर हुसैन, मोहम्मद अब्बास, रहीस हैदर, हाजी हसन रज़ा, हाजी मोहम्मद रज़ा, विलादत अली, मास्टर हैदर अली, इमरान अली, क़मर अली, अली रागिब, शहज़ाद अली और शबी अब्बास मौजूद रहे। सभी ने मिलकर प्रोग्राम की कामयाबी और अकीदतमंदों की सहूलियत के लिए पूरी मेहनत की।
जुलूस में शामिल हजारों लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए दुआएं मांगी और इंसाफ, सब्र और इंसानियत की राह पर चलने का अहद किया। पूरा माहौल ग़मगीन लेकिन अकीदत से भरा हुआ नजर आया।















