मुज़फ्फरनगर में आत्मा योजना के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। जिले के श्री राम कॉलेज में सोमवार से 25 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कृषि और उससे संबंधित विभिन्न क्षेत्रों जैसे उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन और गन्ना विभाग की नवीनतम तकनीकों से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाना है।
कार्यक्रम का संचालन उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही के निर्देशन में किया गया। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण प्रधानमंत्री के विजन 2047 को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से ग्रामीण युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने का अवसर नहीं मिलेगा, बल्कि वे भविष्य में खुद का व्यवसाय शुरू कर अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम बनेंगे। सिरोही ने कहा कि आज कृषि केवल खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें तकनीकी, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन जैसे अनेक अवसर मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा एक सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव बन सकते हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन 90 से अधिक ग्रामीण युवाओं ने प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रथम सत्र में उन्हें मत्स्य पालन से संबंधित आधुनिक तकनीकों और उससे होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मत्स्य पालन एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि किस प्रकार सही जल प्रबंधन, उचित खाद्य सामग्री और रोग नियंत्रण के माध्यम से मछलियों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
आगामी दिनों में प्रशिक्षण के अंतर्गत उद्यानिकी, जैविक खेती, पशुपालन, गन्ना उत्पादन, मधुमक्खी पालन, फसल संरक्षण, मिट्टी परीक्षण और कृषि यंत्रों के रखरखाव जैसे विषयों पर भी युवाओं को विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागी युवाओं को व्यवहारिक ज्ञान के साथ-साथ तकनीकी पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि वे अपने गांवों में आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि कर सकें।
कार्यक्रम के अवसर पर श्री राम कॉलेज के निदेशक डॉ. अशोक कुमार, प्राचार्य डॉ. प्रेरणा मित्तल, विषय विशेषज्ञ सचिन कुमार तथा कृषि विभाग के एचओडी डॉ. नईम अली सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने युवाओं को प्रशिक्षण के हर सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने और सीखी गई तकनीकों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल युवाओं के कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमशीलता को भी बढ़ावा देगा। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि युवाओं में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की भावना भी सशक्त होगी।
















