वाणी संस्था की मासिक गोष्ठी में कविताओं ने छेड़े भावों के सुर.

मुज़फ्फरनगर। नगर की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था वाणी की मासिक गोष्ठी का आयोजन कवि सुनील कुमार शर्मा के पटेलनगर स्थित आवास पर किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री वीना गर्ग ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी स्वयं आयोजक सुनील कुमार शर्मा ने निभाई। सुसंस्कृत वातावरण में साहित्य और काव्य के सुर जब गूंजे, तो उपस्थित श्रोतागण भाव-विभोर हो उठे।

कार्यक्रम का शुभारंभ वीना गर्ग द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने वातावरण को भक्तिभाव से भर दिया। इसके बाद एक-एक कर कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर गोष्ठी को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पंकज शर्मा ने अपनी कविता में नदी की लहरों की बेचैनी के माध्यम से जीवन की उदासी को इस प्रकार व्यक्त किया— “बेचैन सी लहरों में ठहरी सी उदासी है, मिलकर भी समंदर से क्यों नदी ये प्यासी है।” उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को आत्मचिंतन के भावों में डुबो दिया।रामकुमार शर्मा रागी ने अपनी रचना के माध्यम से कठिन दौर में भी उम्मीद और खुशियों की आहट का संदेश दिया। उन्होंने कहा— “गर्दिशों के दौर में खुशियों की आहट भेजी है, एक बेटी ने पिता को मुस्कुराहट भेजी है।” उनके शब्दों ने संवेदनाओं का गहरा प्रभाव छोड़ा। वहीं, कर्मवीर सिंह ने जीवन की सच्चाई और योग की महत्ता पर आधारित पंक्तियों से सभी को स्वास्थ्य और आत्मसंयम का संदेश दिया— “रखना सेहत का ध्यान योगी जन रहे बताई, है जीवन की सच्चाई।”

मुकेश दर्पन ने देशभक्ति से ओतप्रोत अपनी कविता में मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव प्रकट किया। उन्होंने कहा— “वतन की खाक को माथे की शान करना है, जमीनें हिंद तुझे आसमान करना है।” उनकी पंक्तियों पर उपस्थित जनों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। संतोष कुमार फलक ने प्रेम और सौंदर्य की अभिव्यक्ति करते हुए कहा— “जब से देखा है तुम्हें वैसे के वैसे ही हो, लगता है तुमने हुस्न का बैनामा कर लिया।” उनकी रचना में रोमांटिकता और भावुकता का सुंदर संगम दिखा।बृजेश्वर सिंह त्यागी ने रिश्तों की नाजुकता को शब्दों में ढालते हुए कहा— “तुम मुझसे जुदा हुए इसका मुझको गम नहीं, गैर के तुम हो गए बस यही मलाल है।” वहीं, आयोजनकर्ता सुनील कुमार शर्मा ने दीपावली के उल्लास पर अपनी कविता के माध्यम से स्नेह और अपनत्व का संदेश दिया— “आज फिर से हम आए हैं दीपावली मनाने, अंधेरों को भगाने और अपनों को रिझाने।”

कवयित्री सुमन युगल ने मां की महिमा को अपनी भावनाओं के माध्यम से इस प्रकार अभिव्यक्त किया— “मां की आंखें हर क्षण सम्मुख है, कैसे उनका मान गवा दूं, गिरकर जीने की नौबत आए, उसे बेहतर जान गवा दूं।” उनकी पंक्तियों ने सभागार में उपस्थित हर श्रोता के हृदय को छू लिया।अंत में गोष्ठी के आयोजक सुनील कुमार शर्मा ने सभी साहित्यप्रेमियों, कवियों और अतिथियों का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर रामकुमार शर्मा रागी, राहुल वशिष्ठ, पंकज शर्मा, सुमन युगल, वीना गर्ग, संतोष कुमार फलक, बृजेश्वर सिंह त्यागी, कर्मवीर सिंह, मुकेश दर्पन, अर्पित गौतम, सपना अग्रवाल, पुष्पा रानी और बृजराज सिंह सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।यह गोष्ठी न केवल कविताओं के माध्यम से संवेदनाओं की अभिव्यक्ति बनी, बल्कि नगर की साहित्यिक परंपरा को और समृद्ध करने का एक सुंदर प्रयास साबित हुई।

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