आयुष्मान भारत योजना में हाल ही में 562.4 करोड़ रुपये के फर्जी बिलों का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय धोखाधड़ी विरोधी इकाई (NAFU) ने प्राइवेट अस्पतालों द्वारा किए गए 2.7 लाख दावों को फर्जी पाया है। इस पर कार्रवाई करते हुए 1,114 अस्पतालों को पैनल से हटाया गया है और 549 अस्पतालों को निलंबित किया गया है।
फर्जी बिलों के मामलों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में सबसे अधिक गड़बड़ियां पाई गई हैं। उत्तर प्रदेश में 13,902.94 लाख रुपये, मध्य प्रदेश में 11,934.11 लाख रुपये, और छत्तीसगढ़ में 12,034.28 लाख रुपये के फर्जी दावे सामने आए हैं।
इन धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। मध्य प्रदेश में, आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाई जा रही है। इसके तहत, डायलिसिस के मामलों में क्लेम तभी स्वीकार किए जाएंगे जब डॉक्टर या अस्पताल अधीक्षक मरीज के साथ फोटो टीएसएम पोर्टल पर अपलोड करेंगे। यदि फोटो अपलोड नहीं किया गया, तो क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
सरकार आयुष्मान योजना के तहत इम्पैनल्ड अस्पतालों की स्क्रीनिंग भी कर रही है, जिसमें उनकी मूलभूत सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिलने और आवश्यक संसाधनों की कमी होने पर ऐसे अस्पतालों को डीलिस्ट किया जाएगा।इन कदमों का उद्देश्य आयुष्मान भारत योजना में पारदर्शिता बढ़ाना और लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है।















