मुज़फ्फरनगर में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण सुरक्षा टिप्स

मुज़फ्फरनगर जिलाधिकारी ने कहा कि आज के युग में इंटरनेट हमारी जीवनशैली एवं कार्यशैली का अभिन्न अंग बन चुका है। आम जनमानस की सहूलियत एवं कार्य को सुगम बनाने के लिए ई-गवर्नेंस शासन एवं प्रशासन की प्राथमिकता में है। सरकारी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रक्रिया के क्रियान्वयन एवं अन्य ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट्स के चलते सरकारी कामकाज में इंटरनेट प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ेगा। इसके सुरक्षित उपयोग के लिए साइबर अपराध एवं उससे बचाव का ज्ञान आवश्यक है।

अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) गजेंद्र कुमार ने बताया कि बैंक खातों की सुरक्षा हेतु नियमित अंतराल पर पासवर्ड बदलना चाहिए और केवल अधिकृत मोबाइल ऐप/नेटबैंकिंग के माध्यम से ही लेनदेन की निगरानी करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल बैंक से संपर्क करें। उन्होंने साइबर सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए आगाह किया कि लालच के कारण साइबर अपराध के शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है। अतः अनावश्यक कॉल या संदेशों पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।

पुलिस अधीक्षक (अपराध) प्रशांत प्रसाद ने अधिकारियों से साइबर हाइजीन अपनाने और अधीनस्थ कर्मचारियों को भी साइबर सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण देने का आग्रह किया। उन्होंने निम्नलिखित सुरक्षा उपायों पर बल दिया:

  • न्यूनतम 12 अक्षरों का मजबूत पासवर्ड बनाएं और नाम/जन्मतिथि का प्रयोग न करें।
  • अनधिकृत लॉगिन से बचाव के लिए 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को सक्रिय करें।
  • मजबूत स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण सेट करें।
  • केवल विश्वसनीय स्रोतों से ऐप्स डाउनलोड करें।
  • बैंकिंग लेनदेन में सुरक्षित नेटवर्क का उपयोग करें और सार्वजनिक वाईफाई से बचें।
  • संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  • नियमित रूप से सॉफ़्टवेयर एवं ऐप्स अपडेट करें।
  • कार्यस्थल छोड़ने से पहले सिस्टम और ब्राउज़र से लॉगआउट करना सुनिश्चित करें।
  • अनधिकृत हार्डवेयर डिवाइस की जांच करें।

उन्होंने साइबर अपराध जैसे फ़िशिंग, विशिंग, स्पैम मैसेज, स्मिशिंग आदि के बारे में जागरूक किया और बताया कि किसी भी साइबर अपराध की शिकायत 1930 पर कॉल कर या cybercrime.gov.in पर दर्ज कराई जा सकती है।

उन्होंने हाल ही में बढ़ रही “डिजिटल अरेस्ट” की घटनाओं का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं करता। यदि पुलिस विभाग द्वारा कोई सूचना दी जाती है, तो वह संबंधित व्यक्ति को थाने बुलाएगा या घर पर संपर्क करेगा। अतः अनजान नंबरों से वीडियो कॉल प्राप्त करने से बचें।

जिला सूचना विज्ञान अधिकारी ने कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकारी कामकाज के लिए केवल अधिकृत nic.in/gov.in ईमेल का उपयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन जिला सूचना विज्ञान अधिकारी विनीत गर्ग, सहायक जिला सूचना विज्ञान अधिकारी आकांक्षा अग्रवाल एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर प्रिंस जैन ने किया। इस दौरान समस्त जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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