मुजफ्फरनगर। भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ पिछले 30 वर्षों से अनवरत धरना दे रहे मास्टर विजय सिंह का आंदोलन अब एक ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंच गया है। 26 फरवरी 1996 को ग्राम चौसाना की लगभग 4 हजार बीघा सार्वजनिक कृषि भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 900 करोड़ रुपये बताई जाती है, को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पर सत्याग्रह शुरू किया था। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर और शामली जनपद की लगभग 6 लाख बीघा ग्राम सभा, तालाब, वन और बंजर भूमि को भू-माफियाओं से मुक्त कराने की लड़ाई भी उनके आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य है। तीन दशक पूरे कर चुका यह धरना अब दुनिया का सबसे लंबा धरना बताया जा रहा है, जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सहित कई संस्थाओं ने दर्ज किया है।
मास्टर विजय सिंह का कहना है कि 8 अप्रैल 2019 को शामली में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि घोटाले की जांच के आदेश दिए थे। एसडीएम ऊन द्वारा की गई जांच में सैकड़ों करोड़ की सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होने और संबंधित व्यक्ति को भू-माफिया घोषित करने की संस्तुति के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव और प्रभावशाली लोगों की लॉबी के कारण कार्रवाई लंबित है। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री स्वयं जांच रिपोर्ट की समीक्षा करें और यदि उनके आरोप गलत साबित हों तो उन्हें कठोर दंड दिया जाए।इस आंदोलन की तुलना अमेरिका में व्हाइट हाउस के सामने 27 वर्षों तक धरना देने वाले विलियम थॉमस और मणिपुर में 16 वर्षों तक भूख हड़ताल करने वाली इरोम शर्मिला के संघर्ष से की जा रही है। मास्टर विजय सिंह का दावा है कि उनका 30 वर्ष का सत्याग्रह इन आंदोलनों से भी लंबा है। वे शिव चौक पर गर्मी, सर्दी और बरसात में लगातार 24 घंटे धरनारत रहते हैं और महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित होकर अहिंसात्मक संघर्ष कर रहे हैं।
भूमि घोटाले की जांच मेरठ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर और सीबीसीआईडी के अधिकारियों सहित कई स्तरों पर हो चुकी है, जिनमें अवैध कब्जे की पुष्टि होने का दावा किया गया। बावजूद इसके, सत्ता परिवर्तन के साथ आरोपियों के दल बदल लेने और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते कार्रवाई अधर में लटकती रही। आंदोलन के दौरान उन पर हमले, झूठे मुकदमे और अवैध हिरासत जैसी घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने अपना सत्याग्रह जारी रखा। वर्ष 2013 में उन्होंने मृत्यु के बाद शरीर दान करने की घोषणा भी की।मास्टर विजय सिंह का कहना है कि 30 साल पहले एक भूखे बच्चे की पीड़ा ने उन्हें झकझोर दिया था, जिसके बाद उन्होंने अध्यापक पद से इस्तीफा देकर सार्वजनिक जमीन बचाने का संकल्प लिया। वे कई पद यात्राएं कर चुके हैं, जिनमें मुजफ्फरनगर से लखनऊ और दिल्ली राजघाट तक की यात्राएं शामिल हैं। उनका कहना है कि वे अंतिम सांस तक भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे और एक-एक इंच सार्वजनिक भूमि को मुक्त कराने तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
















