इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर फर्जी दावे का आरोप, एक्सपो एरिया खाली करने का आदेश

गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर ट्रोल हो रही है. नई दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के एक्सपो में गलगोटिया प्रोफेसर द्वारा चीनी ड्रोन और रोबोट को अपना बताने के बाद बवाल मच गया है. सोशल मीडिया पर लोग यूनिवर्सिटी पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यूनिवर्सिटी की इस हरकत से देश की भी बदनामी हुई है.चीनी रोबोट के बाद, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कैंपस में स्क्रैच से सॉकर ड्रोन बनाया है. असलियत में यह मार्केट में स्ट्राइकर V3 ARF के तौर पर सिर्फ़ 40 हजार में उपलब्ध है और कोरियन कंपनी द्वारा बनाया गया है.

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने किया ट्रोल

सॉकर ड्रोन को यूनिवर्सिटी स्टाफ ने अपनी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग का प्रोडक्ट बताया है. वायरल हो रही ऑनलाइन वीडियो में गलगोटियास यूनिवर्सिटी की एक कर्मचारी को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “तो असल में, एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लीकेशन तक, हमारे पास एक सिमुलेशन लैब से लेकर एप्लीकेशन एरिना तक है और यह कैंपस में भारत का पहला सॉकर एरिना है.सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने दावा किया कि ड्रोन एक कमर्शियली उपलब्ध मॉडल है जिसे स्ट्राइकर V3 ARF के नाम से जाना जाता है, जिसे भारतीय बाजार में लगभग 40 हजार में खरीदा जा सकता है. हेलसेल स्ट्राइकर V3 असल में एक सॉकर ड्रोन है जिसे दक्षिण कोरिया के हेलसेल ग्रुप ने ड्रोन स्पोर्ट्स के लिए डेवलप किया है.

गलगोटिया को एक्सपो एरिया खाली करने का आदेश

वीडियो वायरल होने के बुधवार को गलगोटिया यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों को एक्सपो एरिया खाली करने के लिए कहा गया है. इस वीडियो में जो रोबोट था, वह यूनिट्री Go2 था, जो चीनी कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का बनाया हुआ मॉडल है. यही मशीन भारत में ऑनलाइन 2 लाख रुपये से 3 लाख रुपये के बीच बिकती है. समिट में डिवाइस पर ओरियन का लेबल लगा था. फिर यूनिवर्सिटी स्टाफ ने बड़े कॉन्फिडेंस से इसको अपना बताया.

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