ईरान में खामोश बगावत: हिजाब के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएं

ईरान की सड़कों पर इन दिनों एक अनोखा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। बिना किसी नारे, हथियार या हिंसा के ईरानी महिलाएं सख्त हिजाब कानूनों और धार्मिक पाबंदियों के खिलाफ खुला विरोध दर्ज करा रही हैं। यह विरोध किसी संगठित आंदोलन की तरह नहीं दिखता, लेकिन इसका असर बेहद गहरा है। महिलाएं खुलेआम सिर से दुपट्टा उतारकर सड़कों पर निकल रही हैं, जो ईरान जैसे कट्टर नियमों वाले देश में साहसिक कदम माना जा रहा है। यह खामोश बगावत महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन की याद दिलाती है, जहां डर के बजाय सामूहिक साहस सबसे बड़ा हथियार बनता है।

ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान सरकार हिजाब नियमों को पहले से ज्यादा सख्ती से लागू करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए नैतिक पुलिस और निगरानी तंत्र को फिर सक्रिय किया गया है। इसके बावजूद, बड़े शहरों में महिलाएं अब खुलकर इन नियमों को चुनौती दे रही हैं। तेहरान, शिराज और कुर्द बहुल इलाकों में महिलाएं बिना हिजाब सड़कों, मॉल और कैफे में दिखाई दे रही हैं। कई महिलाएं अपने इस विरोध के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं, जो देखते ही देखते वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन रहे हैं।

यह आंदोलन अचानक नहीं उभरा है। 2022 में महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने महिलाओं के भीतर गहरे असंतोष को जन्म दिया। उस समय भले ही सरकार ने सख्ती से प्रदर्शन दबा दिए हों, लेकिन महिलाओं की सोच और हिम्मत को दबाया नहीं जा सका। आज वही चुपचाप लेकिन लगातार सामने आ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खामोश विरोध सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि इसे बल प्रयोग से रोकना आसान नहीं है। बिना नारे और हिंसा के यह आंदोलन समाज में धीरे-धीरे बदलाव की जमीन तैयार कर रहा है। ईरान की महिलाएं अब साफ संकेत दे रही हैं कि वे अपने अधिकारों और स्वतंत्रता को लेकर पीछे हटने वाली नहीं हैं।

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