भारत में बनेगा रूसी सुखोई SJ-100: आत्मनिर्भर उड़ान या बड़ा जोखिम?

भारत अब नागरिक उड्डयन में आत्मनिर्भरता की नई उड़ान भरने जा रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) रूस के साथ मिलकर भारत में ही सुखोई सुपरजेट SJ-100 विमान बनाएगा। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ मिशन को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है। लेकिन इस प्रोजेक्ट के साथ एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा है — वही विमान जिसका सुरक्षा रिकॉर्ड विवादों से घिरा रहा है।पिछले 14 वर्षों में सुखोई सुपरजेट के 95 हादसे हो चुके हैं, जिनमें 89 लोगों की मौत हुई है। यही आंकड़े इस डील को लेकर सवाल खड़े करते हैं। आखिर भारत ने इसी विमान को क्यों चुना? विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की नजर रूस की तकनीक के जरिए कम लागत वाले घरेलू यात्री विमान निर्माण पर है, जिससे विदेशी निर्भरता कम की जा सके।हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर एविएशन सेक्टर में दो राय हैं — कुछ इसे भारत की ‘साहसी उड़ान’ मानते हैं, जबकि अन्य इसे ‘महंगा दांव’ बता रहे हैं। अब देखना होगा कि HAL और रूस की यह साझेदारी भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी या फिर सुरक्षा और प्रदर्शन के मोर्चे पर इसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

HAL का ‘Game-Changing’ समझौता

27 अक्टूबर 2025 को मॉस्को में एक ऐतिहासिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर हुए. Hindustan Aeronautics Limited (HAL) और रूस की United Aircraft Corporation (UAC) ने समझौता किया कि रूस का Sukhoi Superjet SJ-100 अब भारत में बनेगा. HAL ने X पर MoU की कुछ फोटो शेयर करते हुए लिखा, “यह समझौता भारत में घरेलू नागरिक विमान उत्पादन का नया अध्याय खोलेगा.”

भारतीय विमान कंपनियों ने खरीदें 100 अरब डॉलर से भी ज़्यादा के विमान

UAC वही कंपनी है जो भारतीय वायुसेना के लिए तेजस, ध्रुव, और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान बनाती है. लेकिन यह पहली बार है जब HAL किसी commercial passenger aircraft का निर्माण करने जा रही है. The Hindu की रिपोर्ट बताती है कि भारत को अगले 20 साल में 2,200 नए नागरिक विमान की ज़रूरत होगी. अभी तक भारत पूरी तरह Boeing और Airbus पर निर्भर है, एयर इंडिया, इंडिगो और आकासा एयर जैसी भारतीय एयरलाइन्स ने पिछले दो सालों में 1,100 से ज़्यादा विमान खरीदे हैं, जिनकी कीमत 100 अरब डॉलर से भी ज़्यादा है.एयर इंडिया ने फरवरी 2023 में 470 विमानों का ऑर्डर दिया, और 2024 के अंत में 100 और विमानों का, यानी कुल 570 विमान खरीदे। इंडिगो ने जून 2023 में 500 नैरो-बॉडी विमानों का ऑर्डर दिया, और बाद में 30 वाइड-बॉडी A350 विमान जोड़े। ऐसे में अगर HAL भारत में ही विमान बनाए, तो अरबों डॉलर विदेशी निर्भरता से बच सकते हैं।

रूस के लिए नया सुपरजेट – भारत के लिए नई उम्मीद?

2023 में रूस ने सुपरजेट का नया वर्जन लॉन्च किया, Russified SJ-100R, जिसमें सभी कंपोनेंट्स अब Made in Russia हैं, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने अपने पुर्ज़े खुद बनाने शुरू कर दिए हैं.यूरेशियन टाइम्स ने लिखा है, “एचएएल संभवतः एसजे-100 का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन जाएगा, जो भारत-रूस नागरिक विमानन सहयोग में एक नए युग का सूत्रपात करेगा.” भारत और रूस के बीच रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में दशकों पुराना भरोसा है और अब यह भरोसा नागरिक विमानन तक पहुंच गया है.लेकिन कुछ आलोचकों का कहना है, “नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) रक्षा से अलग है. यहां सेफ्टी और ग्लोबल सर्टिफिकेशन सबसे बड़ी परीक्षा होगी.”

क्या यह Make in India की सबसे बड़ी परीक्षा है?

भारत के लिए यह डील दोहरी जीत है, आर्थिक आज़ादी और तकनीकी आत्मनिर्भरता. द हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है, “घरेलू विमान उत्पादन से आयात में अरबों की बचत हो सकती है और हजारों कुशल कामगारों और तकनीकी जानकारों के लिए नौकरियां पैदा हो सकती हैं.”लेकिन हर बड़ा कदम अपने साथ जोखिम भी लाता है. कई एविएशन एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं, “भारत को इस विमान की सुरक्षा और परफॉर्मेंस को global standards पर जांचना होगा.” हालांकि, HAL का दावा है कि सभी विमान DGCA और ICAO नॉर्म्स के तहत सर्टिफाइड होंगे. यानी, “सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं.”“रूस का सुपरजेट अब भारत की ज़मीन पर उतरेगा, लेकिन इसे आसमान में टिके रहने के लिए चाहिए भरोसा, सिर्फ तकनीक का नहीं, सुरक्षा का भी. कभी HAL ने देश को लड़ाकू विमान बनाकर आत्मनिर्भर किया था, अब वही कंपनी नागरिक आसमान में उड़ान भरने जा रही है. सवाल ये नहीं कि ये डील कितनी बड़ी है, सवाल ये है कि क्या ये सुरक्षित भी है?

 

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