भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने केंद्रीय बजट से पूर्व किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र की बेहतरी के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। यूनियन का कहना है कि कृषि क्षेत्र, जो सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है, लंबे समय से उपेक्षित है और इसे व्यापक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है।

प्रमुख सुझाव:
- फसल का लाभकारी समर्थन मूल्य: एमएसपी को सी2 लागत का 1.5 गुना तय करने और सभी फसलों को एमएसपी के दायरे में लाने का आग्रह।
- पंचवर्षीय कृषि नीति: दीर्घकालिक कृषि नीति में जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की गुणवत्ता, किसानों की आजीविका, और संसाधनों के संरक्षण को शामिल करने का सुझाव।
- कृषि ऋण और पुनर्गठन: सस्ती और दीर्घकालिक ऋण योजनाओं के साथ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ऋण पुनर्गठन की सुविधा।
- फसल बीमा सुधार: छोटे किसानों के लिए बीमा प्रीमियम माफ करने और उन्नत तकनीकों से नुकसान का आकलन तेज़ करने की योजना।
- कृषि विपणन और इंफ्रास्ट्रक्चर: 42,000 मंडियों का निर्माण और भंडारण सुविधाओं को आधुनिक बनाने का प्रस्ताव।
- जल प्रबंधन और सिंचाई: नहर आधारित परियोजनाओं और जल संरक्षण योजनाओं की आवश्यकता पर जोर।
- कृषि उपकरणों पर जीएसटी हटाना: सभी कृषि उपकरणों और सामग्रियों को जीएसटी से मुक्त करने की मांग।
- सामाजिक सुरक्षा: किसानों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी योजनाओं का प्रावधान।
- निर्यातक फसलों के लिए बोर्ड: कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नए बोर्ड की स्थापना का सुझाव।
- जलवायु परिवर्तन की तैयारी: हीट वेव, असमय बारिश, और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की योजना।
यूनियन ने सरकार से कृषि को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाने की अपील की है।















