मुजफ्फरनगर की क्रांतिकारी शालू सैनी ने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को अपनी जिम्मेदारी समझा है। उनके प्रयासों से उन लोगों को सम्मानित विदाई मिलती है, जिन्हें अक्सर समाज में भुला दिया जाता है।शालू सैनी का यह कार्य न केवल मानवता की सेवा है, बल्कि यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो। उनके काम का विस्तार अब उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों में भी हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि उनकी सेवा का दायरा कितना बड़ा हो गया है।इस प्रकार की सेवाओं के लिए समाज से सहयोग की अपील करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि और लोग इस दिशा में आगे बढ़ें और मानवता की सेवा में अपना योगदान दें। शालू सैनी का यह प्रयास सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।















