बांदा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट मिशन शक्ति फेज-6.0 ने बांदा में असर दिखाना शुरू कर दिया है। महिलाओं को अब थाने-कचहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि अफसर खुद उनकी चौखट पर सुनवाई करेंगे। इसी संकल्प के साथ आज जनपद की सभी तहसीलों में एक साथ पिंक समाधान दिवस का आयोजन किया गया, जिसने महिला सशक्तीकरण की नई इबारत लिख दी।10 दिवसीय विशेष अभियान के तहत चल रहे इस कार्यक्रम का मकसद सिर्फ शिकायत सुनना नहीं है। मकसद है महिलाओं को डर से आजाद करना। उन्हें एक ऐसा मंच देना जहाँ वो बिना झिझक, बिना डर के अपनी बात रख सकें और उसी दिन न्याय पा सकें। सबसे बड़ी सुनवाई सदर तहसील में हुई, जहाँ जिलाधिकारी बांदा अमित आसेरी और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने खुद कुर्सी छोड़कर फरियादियों के बीच पहुंच गए। एक तरफ डीएम राजस्व की फाइलें देख रहे थे, दूसरी तरफ एसपी महिला संबंधी अपराधों पर तुरंत एक्शन के निर्देश दे रहे थे।
एक महिला ने जमीन पर कब्जे की शिकायत की तो डीएम ने तत्काल एसडीएम को फोन लगाकर 24 घंटे में पैमाइश के आदेश दिए। वहीं दूसरी महिला ने ससुराल में प्रताड़ना की बात कही तो एसपी ने तुरंत महिला थानाध्यक्ष को आज ही कार्रवाई के निर्देश दिए। हर महिला को बताया गया कि 1090, 112, 1076 सिर्फ नंबर नहीं, उनकी सुरक्षा की गारंटी हैं। साथ ही कन्या सुमंगला, सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं की जानकारी दी गई। सभी थानों और तहसीलों को निर्देश कि महिला फरियादी आए तो कुर्सी दो, पानी दो, और पहले सुनो। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने कहा महिलाओं की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। पिंक समाधान दिवस के जरिए हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर पीड़िता को त्वरित और सम्मानजनक न्याय मिले।















