नॉर्वे और डेनमार्क को दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में गिना जाता है। हर साल जारी होने वाली वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में ये दोनों देश शीर्ष स्थानों पर रहते हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था के कारण इन देशों के नागरिक खुद को सुरक्षित और संतुष्ट महसूस करते हैं। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बयानों ने इन दोनों खुशहाल देशों की चिंता बढ़ा दी है।
डेनमार्क की परेशानी की जड़ ग्रीनलैंड है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन रणनीतिक और भौगोलिक महत्व के चलते अमेरिका लंबे समय से इसमें रुचि दिखाता रहा है। ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों के बाद डेनमार्क में संप्रभुता को लेकर चिंता गहराने लगी है। डेनमार्क के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में यह डर सताने लगा है कि कहीं अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण देश को अपने इस अहम क्षेत्र पर समझौता न करना पड़े।वहीं नॉर्वे की चिंता रूस से जुड़ी है। नॉर्वे की सीमा रूस से लगती है और यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा हालात पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में ट्रंप की नाटो और यूरोपीय सुरक्षा को लेकर ढुलमुल नीति ने नॉर्वे की चिंता और बढ़ा दी है। नॉर्वे को आशंका है कि अगर अमेरिका ने यूरोप की सुरक्षा से हाथ खींचा तो रूस और आक्रामक रुख अपना सकता है, जिससे बड़े युद्ध का खतरा पैदा हो सकता है।इसी आशंका के चलते नॉर्वे सरकार ने अपने नागरिकों को संभावित युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा है। सरकार ने करीब 13 हजार नागरिकों को पत्र भेजकर जानकारी दी है कि आपात स्थिति या युद्ध की हालत में उनके घर और संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कदम दिखाता है कि दुनिया के सबसे खुशहाल कहे जाने वाले देश भी अब खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। अमेरिका की वैश्विक नीतियों का असर अब उन देशों पर भी साफ दिखने लगा है, जो अब तक स्थिरता और शांति के प्रतीक माने जाते थे।
अमेरिका की रडार पर नॉर्वे
नॉर्वे अमेरिका खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रडार पर आ गया है. हाल ही में ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा था कि मुझे आपके यहां से नोबेल नहीं मिला, इसलिए मैं अब शांति की पहल नहीं करूंगा. इतना ही नहीं, नॉर्वे ने भी ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया है.नॉर्वे ने अपने नागरिकों से भी कहा है कि विश्वयुद्ध की शुरुआत कभी भी हो सकती है, इसलिए सब लोग मानसिक रूप से तैयार रहें. द सन के मुताबिक नॉर्वे की सरकार ने आम नागरिकों को इसके लिए पत्र भी भेजा है.















