ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की शुरुआत बीते 28 फरवरी, 2026 को हुई थी. इसके बाद से ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस रूट पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया. यह रास्ता दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई के लिए अहम है. इस रुकावट से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई और सरकारों तथा शिपिंग कंपनियों को व्यापार जारी रखने के लिए नई रणनीतियां बनानी पड़ी.भारत के लिए यह मामला बहुत अहम था, जो ऊर्जा की अपनी जरूरतों के लिए काफी हद तक इसी जलमार्ग पर निर्भर है. भारत का लगभग 30 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 70 प्रतिशत लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) इसी रास्ते से आता है. हालांकि, हालात बिगड़ने के बावजूद भारत इस इलाके से जहाजों की आवाजाही को लगातार बनाए रखने में कामयाब रहा है.
क्या होर्मुज में फंसे हैं भारतीय जहाज?
फरवरी के आखिर में जब तनाव बढ़ा और होर्मुज पर पाबंदियां लगाई गईं, तो भारतीय झंडे वाले 36 से 38 कमर्शियल जहाज या तो खाड़ी इलाके में फंसे हुए थे या होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास मौजूद थे. इन जहाजों पर 1,100 से ज्यादा भारतीय नाविकों की भी संख्या थी. कई जहाजों में भारत की ऊर्जा जरूरतों और कमर्शियल सप्लाई चेन से जुड़े जरूरी सामान लदे हुए थे. कुछ अन्य जहाज औद्योगिक उत्पादन और घरेलू खपत के लिए जरूरी सामान ले जाने का इंतजार कर रहे थे.सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के मध्य से अब तक भारतीय झंडे वाले लगभग 23 से 25 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं. मई के आखिर तक, खबर है कि भारतीय झंडे वाले सिर्फ 13 ही जहाज खाड़ी देशों के आसपास या जलडमरूमध्य वाले इलाके में बचे हुए हैं. इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सरकार हाई-प्रॉयोरिटी इमरजेंसी ऑपरेशन कर रही है.
क्या भारत में है गैस की किल्लत?
सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक देश में घरेलू सिलेंडराें की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य और सुरक्षित है. होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए देश के भीतर तेल रिफाइनरियां अपनी अधिकतम कैपेसिटी पर काम कर रही हैं. इससे दैनिक एलपीजी उत्पादन बढ़कर 50000 मीट्रिक टन हो गया है, जो देश की कुल जरूरत का 60% से अधिक हिस्सा पूरा कर रहा है.केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए साफ कहा है, ”घरेलू उपभोक्ताओं के लिए देश में LPG सिलेंडर की कोई किल्लत नहीं है और गैस सप्लाई पूरी तरह से सामान्य है. नागरिकों को किसी भी तरह से घबराने की कोई जरूरत नहीं है.























































