सहारनपुर लोकसभा सीट: मुस्लिम बाहुल्य सीट पर क्या कहता है जातीय समीकरण

2019 में बसपा ने किया था कमाल, दूसरे नंबर पर रही थी भाजपा

सहारनपुर, लोकसभा 2024 में होने वाला चुनाव अब बहुत नजदीक है, ऐसे में चुनाव को लेकर जीत-हार की चर्चा जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।राजनीतिक सूरमाओं ने भी टिकट को लेकर दौड़-भाग तेज कर रखी है।बात करते हैं कि उत्तर प्रदेश की पहली लोकसभा सीट सहारनपुर की। मुस्लिम बाहुल्य वाली इस सीट पर करीब सात लाख से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। इसके अलावा ग्यारह लाख हिन्दू व अन्य वोटरों को मिलाकर यहां कुल 18 लाख मतदाता रहते हैं। राजनीति के धुरंधरों का समीकरण बिगड़ाने और बनाने में मुस्लिम वोटरों का अहम किरदार इस सीट पर माना जाता है। यही वजह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर के लोगों ने मुस्लिम प्रत्याशी का चुनाव कर लोकसभा तक पहुंचाया। वर्तमान में इस सीट से बसपा के हाजी फजुर्लरहमान सांसद हैं।
इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इस सीट को हथियाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। यही कारण है कि इस सीट पर कमल खिलाने के लिए भाजपा मुस्लिम वोटरों को भी साधने में लगी है। पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशी हाजी फजुलर्रहमान को 5,14,139 वोट मिले थे। वहीं दूसरे नंबर पर रहे भाजपा के राघव लखनपाल शर्मा को 4,91,722 वोट पड़े थे। भाजपा प्रत्याशी बसपा उम्मीदवार से महज 20 हजार वोटों से हार गए थे। वहीं तीसरे नंबर पर कांग्रेस के इमरान मसूद थे। इन्हें दो लाख से ज्यादा वोट मिले थे।बीते लोकसभा 2019 में हार का मलाल भाजपा को है लेकिन इस बार पार्टी उस हार का हिसाब पूरा करना चाहती है। इसको लेकर भाजपा ने तैयारियां भी तेज कर दी हैं। यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से भाजपा की उन 17 सीटों पर नजर सबसे ज्यादा है जो 2019 में हार गई थी। इनमें से एक सहारनपुर की सीट भी शामिल है।सियासी आंकड़ों की बात की जाए तो सहारनपुर में सबसे ज्यादा राज कांग्रेस ने किया है। करीब तीन बार बसपा और दो-दो बार भाजपा और जनता पार्टी का कब्जा रहा है। इस शहर की आबादी की बात करें तो यहां करीब 56 प्रतिशत हिंदू और 43 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम समुदाय के लोगों की है। 2019 में यहां करीब 1230443 मतदाताओं ने वोट डाला था, जिसमें करीब 54 प्रतिशत पुरुष और 41 फीसदी महिलाओं ने हिस्सा लिया था। सहारनपुर में सबसे पहला चुनाव 1952 में हुआ था। 1977 तक इस सीट पर कांग्रेस ने ही राज किया। इसके बाद इमरजेंसी लग गई थी। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव से लेकर 1996 तक इस सीट परपुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार सहारनपुर में भारतीय पुरातन संस्कृति के प्रमाण उपलब्ध हैं। यहां के प्रारम्भिक निवासियों को 2000 ईं पूर्व में व सिन्धु घाटी सभ्यता से भी जोड़ा गया है। यहां के अंबकेरी, बड़गांव व हुलास गांव से हड़प्पा संस्कृति के सामान बहुत सारी वस्तुएं में मिलीं। यहां के नक्कुड़ कस्बा महाभारतकालीन है जिसे नकुल के द्वारा बसाया गया था।

यूपी की 80 लोकसभा सीटों में सबसे पहला लोकसभा क्षेत्र सहारनपुर ही है। सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात, देवबंद, बेहट और रामपुर मनिहरण शामिल हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक 3860 किलोमीटर वर्ग में फैले इस शहर की आबादी करीब 34 लाख 66 हजार 382 है।
वर्तमान में यहां की पांच विधानसभा सीटों में तीन पर भाजपा का राज है, जबकि दो सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है। बेहट विधानसभा सीट से सपा के उमर अली खान ने परचम लहराया था तो वहीं सहारनपुर नगर में भाजपा के राजीव गुम्बर चुनाव जीते थे। सहारनपुर में सपा के आशु मलिक, देवबंद में भाजपा के ब्रिजेश सिंह और रामपुर मनिहाराना (एससी) पर भाजपा के देवेंद्र कुमार निम विधायक हैं।

2024 की ताजा मतदाता सूची के अनुसार सहारनपुर लोकसभा में कुल 1844197 मतदाता हैं जिसमें 974625 पुरुष, 869478 महिला व 94 ट्रांसजैंडर मतदाता हैं।

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