उत्तर प्रदेश के अधिकांश मेडिकल कॉलेजों पर एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) ने जुर्माना लगा दिया है। इसमें केजीएमयू, बीएचयू, आरएमएल सहित प्रदेश के नामचीन सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।कॉलेजों पर दो लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक की पैनल्टी लगाई गई है। एनएमसी द्वारा कराई गई ऑनलाइन जांच में इन मेडिकल कॉलेजों में मानक पूरे नहीं मिले हैं। जुर्माना जमा करने को सात दिन की मोहलत दी गई है। कॉलेजों को एमबीबीएस की सीटों पर जुर्माने के साथ अनुमति दी है। साथ ही दो महीने में मानक पूरे करने की चेतावनी भी दी गई है।
मानक पूरे न करने वाले मेडिकल कॉलेजों पर एनएमसी ने शिकंजा करा दिया है। कई बार चेतावनी के बाद भी गानक पूरे न होने पर अब ऐसे सभी कॉलेजों पर जुर्माना लगा दिया गया है। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेर्जा पर लगाए गए कुल जुर्माने की धनराशि करोड़ों में है। एनएमसी पिछले सालों में मेडिकल कॉलेजों द्वारा सीटें बढ़ाने के आवेदनों पर भौतिक निरीक्षण कराती रही है। इस बार नियामक संस्था द्वारा सभी मेडिकल कॉलेजों से मानकों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन मांगा गया था। फिर उन्हें कमियां पूरी करने के लिए चेताया भी गया, मगर कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में अब एनएमसी ने तमाम सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों पर जुर्माना लगा दिया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अब तक करीब चार दर्जन मेडिकल कॉलेजों पर पैनल्टी लग चुकी है। अभी यह सिलसिला लगातार जारी है।
इन कॉलेजों पर लगा सर्वाधिक जुर्माना
सरकारी कॉलेजों में सर्वाधिक 20 लाख रुपये जुर्माना केजीएमयू पर लगा है जबकि बीएचयू पर 12 लाख, अयोध्या के मेडिकल कॉलेज पर 12 लाख, बदायूं मेडिकल कॉलेज पर 12 लाख, आरएमएल पर 4 लाख और सैफई स्थित आर्युविज्ञान संस्थान पर 4 लाख और झांसी मेडिकल कॉलेज पर 3 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। बस्ती, देवरिया, फतेहपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सिद्धार्थनगर, शाहजहांपुर, एटा, अंबेडकर नगर, बांदा, सहारनपुर, जालौन के मेडिकल कॉलेजों पर 2-2 लाख का जुर्माना लगा है। कॉलेजों को भेजे गए आदेश में एनएमसी ने जुर्माना जमा करने को सात दिन की मोहलत देने के साथ ही अपने बैंक खाते का डिटेल भी दिया है। साथ ही दो माह बाद फिर मानकों के परीक्षण की चेतावनी भी दी है।
फैकल्टी के मानक अधूरे
अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के मानक पूरे न होने के मामले हैं जबकि कुछ जगहों पर इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों की भी कमी है। निजी मेडिकल कॉलेज तो अपने स्त्रोतों से पैनल्टी की राशि जमा करने की व्यवस्था करेंगे। मगर सवाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों का है। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक किंजल सिंह से फोन पर बात करने का प्रयास किया गया। मगर कॉल रिसीव नहीं हुई। व्हाट्सएप मैसेज का भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
















