65 साल पहले बाथरूम में रिकॉर्ड हुआ था लता मंगेशकर का यह अमर गीत,

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं, जिन्होंने समय की सीमाओं को पार कर हमेशा के लिए अपनी जगह बना ली। ऐसा ही एक गीत है “प्यार किया तो डरना क्या”, जिसे महान गायिका लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज़ दी थी। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच उतना ही लोकप्रिय है, जितना अपनी रिलीज़ के समय था। दिलचस्प बात यह है कि करीब 65 साल पहले इस गीत की रिकॉर्डिंग किसी अत्याधुनिक स्टूडियो में नहीं, बल्कि बाथरूम में की गई थी। उस दौर में यह प्रयोग बेहद अनोखा माना गया था।

यह गीत फिल्म Mughal-e-Azam का हिस्सा था, जिसका निर्देशन के. आसिफ ने किया था। फिल्म का संगीत महान संगीतकार नौशाद ने तैयार किया था। नौशाद चाहते थे कि गीत में ऐसी गूंज (इको) सुनाई दे, जिससे शाही महल का भव्य वातावरण महसूस हो। उस समय आधुनिक रिकॉर्डिंग तकनीक और डिजिटल इफेक्ट्स उपलब्ध नहीं थे, इसलिए प्राकृतिक गूंज पैदा करने के लिए बाथरूम का सहारा लिया गया। वहां की दीवारों से टकराकर लौटने वाली आवाज़ ने गीत को वह अनोखा प्रभाव दिया, जिसने इसे अमर बना दिया।

कहा जाता है कि लता मंगेशकर ने कई बार बाथरूम में खड़े होकर इस गीत को गाया, ताकि रिकॉर्डिंग बिल्कुल वैसी ही हो जैसी संगीतकार चाहते थे। उनकी सुरों पर अद्भुत पकड़ और समर्पण ने इस कठिन प्रक्रिया को सफल बनाया। रिकॉर्डिंग के दौरान हर छोटी-छोटी बारीकी का ध्यान रखा गया, क्योंकि उस दौर में किसी भी गलती को सुधारना आसान नहीं था।

इस गीत की भव्यता केवल इसकी रिकॉर्डिंग तक ही सीमित नहीं थी। फिल्मांकन के लिए बनाए गए प्रसिद्ध शीश महल के सेट पर उस समय लगभग 15 लाख रुपये खर्च किए गए थे, जो 1960 के दशक में बेहद बड़ी राशि मानी जाती थी। हजारों शीशों से सजे इस सेट ने गीत की शाही भव्यता को नई ऊंचाई दी। जब पर्दे पर मधुबाला ने इस गीत पर अभिनय किया, तो वह दृश्य भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार दृश्यों में शामिल हो गया।

आज, छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी “प्यार किया तो डरना क्या” भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर माना जाता है। लता मंगेशकर की सुरीली आवाज़, नौशाद का कालजयी संगीत, के. आसिफ की भव्य कल्पना और मधुबाला का शानदार अभिनय—इन सभी ने मिलकर इस गीत को ऐसा मुकाम दिलाया, जिसे आ

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