राजगढ़ (अलवर)। जन-जन की आस्था के प्रतीक भगवान जगन्नाथ जी महाराज की भव्य रथयात्रा शाही लवाजमें और सशस्त्र पुलिस की सलामी के साथ चौपड़ बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर से निकाली गई। इस दौरान भगवान को इन्द्र रूपी विमान पर विराजमान कर महंत पूरणदास व पं. मदनमोहन शास्त्री ने पूजा-अर्चना की। दूल्हा रूप में सजे भगवान जगन्नाथ के दिव्य दर्शन को चौपड़ बाजार में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
घंटे, घडियाल, शंख ध्वनि और “जय जगदीश हरे” के घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। रथ के आगे भजन मंडलियों ने नृत्य-गान करते हुए भगवान की महिमा का बखान किया। महिला-पुरुष श्रद्धालु रथ के नीचे निकलने की होड़ में धर्मलाभ अर्जित करने को आतुर दिखे। उमस के बावजूद नन्हें बच्चों की पालकियों की परिक्रमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।
रथयात्रा में सीताराम मंदिर, कांकवाड़ी हनुमान मंदिर और अवधूत आश्रम सहित कई मंदिरों के महंतों ने आरती उतारकर भगवान का स्वागत किया। यात्रा मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों और सेवादारों द्वारा मीठे जल, नींबू शरबत और प्रसाद का वितरण किया गया। जगदीश वाल्मीकि की टीम ने पट्टेबाजी कर लोगों को आकर्षित किया।
भगवान जगन्नाथ के गंगाबाग पहुंचने पर वधू पक्ष की ओर से गुलाब की पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। यहीं से सात दिवसीय मेले का शुभारंभ हुआ। मेले में झूले, खिलौने, चाट-पकौड़ी, कुल्फी, गर्म जलेबी जैसे व्यंजनों का लोग आनंद लेते नजर आए। सुरक्षा के लिए अस्थाई पुलिस चौकी भी स्थापित की गई।
👉 रथ की विशेषता:
रथ 171 वर्ष पुराना है, जिसकी शुरुआत 1855 में उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर हुई थी। यह 18 फीट लंबा, 10 फीट चौड़ा और 21 फीट ऊँचा दो मंजिला रथ है। पहले लकड़ी के पहियों से चलता था, अब लोहे के पहियों, स्टेयरिंग और बेयरिंग से आधुनिक स्वरूप दिया गया है।
👉 पोशाक व इत्र की खासियत:
इस बार भगवान को मथुरा की शाही पोशाक पहनाई गई और जयपुर के मोगरे की माला से सजाया गया। उन्हें खाटू दरबार, कोलकाता और विशेष रूप से सऊदी अरब से मंगाए गए इत्रों से महकाया गया।















