बांदा जनपद में अवैध खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बबेरू तहसील क्षेत्र स्थित चरका खादर खंड संख्या-8 की मौरम खदान पर एनजीटी के नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि यहां खनन क्षेत्र में भारी मशीनों के प्रयोग पर प्रतिबंध होने के बावजूद पोकलैंड मशीनों से दिन-रात बालू निकाली जा रही है। सूत्रों के अनुसार खदान संचालक सूरज सिंह द्वारा अनुज्ञा पत्र की शर्तों को ताक पर रखकर निर्धारित क्षेत्रफल से बाहर तक गहरे गड्ढे खोदे जा रहे हैं और बाद में उनमें मिट्टी भरकर औपचारिकता निभाई जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी चपत लगाई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि खदान संचालन में कथित लोकेटरों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो ओवरलोड वाहनों को सुरक्षित तरीके से जिले की सीमा तक निकलवाने का काम करता है। बताया जाता है कि एक दर्जन से अधिक लोग इस नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो अधिकारियों की निगरानी से बचाने में भूमिका निभाते हैं। आरोप यह भी हैं कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है और अवैध संपत्ति अर्जित की जा रही है। खनन क्षेत्र से अधिक मात्रा में बालू निकालकर ओवरलोड ट्रकों के जरिए बाहर भेजा जा रहा है, जिससे सड़कों और पुलों पर भी खतरा बढ़ रहा है।
जिला अधिकारी जे. रिभा द्वारा अन्य खदानों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन चरका खादर खंड-8 पर अब तक ठोस जांच या कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रदेश स्तर पर अवैध खनन के खिलाफ सख्त निर्देश जारी होने के बावजूद यहां नियमों की अनदेखी जारी है। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर किसके दबाव में संबंधित विभाग कार्रवाई से बच रहा है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।















