अमेरिकी सरकार ने एक नई वीजा पॉलिसी की घोषणा की है, जिसका मकसद अमेरिकी टेक कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय सेंसरशिप के दबाव से बचाना है। यह नीति उन विदेशी सरकारी अधिकारियों पर लक्षित है जो अमेरिकी सोशल मीडिया और टेक प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटाने की मांग करते हैं या ऐसे दबाव बनाते हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ जाते हैं।
इस नीति के तहत, ऐसे अधिकारियों को अमेरिका का वीजा देने से इनकार किया जा सकता है, या पहले से जारी वीजा को रद्द किया जा सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस कदम को फ्री-स्पीच और ओपन इंटरनेट की रक्षा के तौर पर पेश किया है।
विदेश विभाग ने स्पष्ट किया कि यह पॉलिसी विशेष रूप से उन मामलों पर लागू होगी जहाँ विदेशी अधिकारी या सरकारी एजेंसियां टेक कंपनियों से बिना वैध कानूनी प्रक्रिया के कंटेंट हटाने या सेंसर करने की मांग करते हैं। इससे उन देशों के अधिकारियों को चेतावनी दी गई है जो लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास करते हैं।
टेक कंपनियों को क्यों मिली राहत?
पिछले कुछ वर्षों में कई देशों की सरकारें अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनियों जैसे फेसबुक, ट्विटर (अब X), यूट्यूब आदि पर स्थानीय कानूनों के तहत कंटेंट हटाने का दबाव बनाती रही हैं। इससे कंपनियों को न केवल कानूनी उलझनों का सामना करना पड़ता है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर प्राइवेसी को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ती है।
नई वीजा पॉलिसी से यह सुनिश्चित होगा कि विदेशी सरकारों द्वारा टेक कंपनियों पर डाले जा रहे सेंसरशिप के अनावश्यक दबाव को अमेरिका की ओर से सख्ती से जवाब दिया जाएगा।















