मंसूरपुर क्षेत्र के ऐतिहासिक दरबार क़िले से ताल्लुक रखने वाले युवा नेता सैयद महबूब का नाम इन दिनों लोगों की जुबान पर है। वह ऐसे ख़ानदान से ताल्लुक रखते हैं जिसकी पहचान महज़ इल्म और रूहानियत तक ही सीमित नहीं रही बल्कि इंसाफ, बहादुरी और अवाम की खिदमत में भी मिसाल कायम की है। यह वही ख़ानदान है जिसके बुज़ुर्ग हज़रत अबुल फरह वस्ति के ज़रिए हिंदुस्तान पहुंचे और यहां दीन की तालीम और इंसानी खिदमत की रूहानी रोशनी फैलाई। शाहजहां ने इस वंश को “खान-ए-जहां खान” का ख़िताब देकर सल्तनत का अमीर बनाया और मंसूरपुर में बसाया। यही से इस सिलसिले की शुरुआत हुई जिसने मंसूर अली खान और मुजफ्फर अली खान जैसी बड़ी शख्सियतें पैदा कीं, जिनके नाम पर मंसूरपुर और मुजफ्फरनगर बसे।
सैयद महबूब मौजूदा दौर में हज़रत मरहूम क़ारी उस्मान मंसूरपुरी (जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम रहे) उनके भतीजे हैं। हज़रत मुफ्ती सलमान और हज़रत मुफ्ती अफ़फान मंसूरपुरी उनके चाचा ज़ाद भाई हैं। इस रिश्ते के साथ-साथ उन्होंने अपने बड़ों की खूबियों को विरासत में लेकर नई सोच और जज़्बे से जनता की खिदमत को अपना मिशन बनाया है।
लोगों का कहना है कि युवा नेता सैयद महबूब अपने साथियों और अवाम के हर दुख-दर्द में हमेशा खड़े रहते हैं। उनकी सादगी, हमदर्दी और इल्म की बदौलत वह क्षेत्र में नई पहचान बनाते हुए अपने बुज़ुर्गों की मोहब्बत और भरोसे की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
सैयद महबूब का कहना है कि जैसे अवाम ने उनके बड़ों पर भरोसा किया, उसी मोहब्बत और भरोसे की उम्मीद के साथ वह भी कंधे से कंधा मिलाकर क्षेत्र की तरक्की के लिए काम करने को तैयार हैं, आप सभी युवा नेता सैयद महबूब को इस चुनाव में जीत दर्ज कराए और उन्हें गांव ओर आवाम की खिदमत करने वाला बनाने में उनका साथ दे आप का भाई आप का बेटा सैयद महबूब।























































