मुजफ्फरनगर में पुलिस अधीक्षक अपराध ने पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों के साथ की गोष्ठी

मुजफ्फरनगर। रिजर्व पुलिस लाइन स्थित सभागार कक्ष में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ ने थानों पर नियुक्त समस्त पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों के साथ एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया। इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में विचाराधीन मामलों की सुनवाई को प्रभावी और समयबद्ध बनाना था। पुलिस अधीक्षक अपराध ने स्पष्ट निर्देश दिए कि न्यायालयों में लंबित मामलों की पैरवी में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य और तथ्यों को समय पर प्रस्तुत किया जाए, जिससे दोषियों को निर्धारित समय में दंड दिलाया जा सके और न्यायिक प्रक्रिया में विलंब न हो।

गोष्ठी के दौरान उन्होंने विशेष रूप से गुणवत्ता युक्त विवेचना और समयबद्ध पैरवी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अभियोगों की विवेचना में लापरवाही के कारण न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है बल्कि पीड़ित पक्ष को भी न्याय मिलने में कठिनाई होती है। उन्होंने निर्देशित किया कि अभियोजन अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जाए और गवाहों को समय से न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। इससे अभियोजन पक्ष मजबूत बनेगा और अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।

उन्होंने अभिलेखों के सुव्यवस्थित संधारण पर भी जोर दिया। पुलिस अधीक्षक अपराध ने कहा कि न्यायालयीन कार्यवाही से संबंधित सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड पूरी तरह से सुरक्षित और व्यवस्थित होने चाहिए ताकि सुनवाई के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि माननीय न्यायालय द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का समय पर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और नियमित रूप से पैरवी से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा कर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए।गोष्ठी में उपस्थित सभी पैरोकारों और कोर्ट मोहर्रिरों को यह भी बताया गया कि न्यायालयीन कार्यवाही को प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर आंतरिक समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर तालमेल होना अनिवार्य है। गवाहों की उपस्थिति और साक्ष्यों की समय पर उपलब्धता न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाती है।

इस मौके पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि न्याय दिलाना पुलिस की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इस कार्य में ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।गोष्ठी में सभी थानों से आए पैरोकार और कोर्ट मोहर्रिर मौजूद रहे और उन्होंने पुलिस अधीक्षक अपराध द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों को गंभीरता से सुना। इस बैठक से स्पष्ट संदेश गया कि अब न्यायालयीन मामलों की पैरवी में तेजी लाई जाएगी और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी व समयबद्ध होगी।

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