दिवाली के नजदीक आते ही पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी देखने को मिल रही है, जिससे राज्य के कई इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य में कुल 176 पराली जलाने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 106 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने 89 मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए 4.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
पंजाब के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की स्थिति चिंताजनक हो रही है। राज्य के चार शहरों का AQI येलो जोन में दर्ज किया गया है, जो ‘मध्यम प्रदूषण’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं न केवल स्थानीय वातावरण को प्रभावित करता है, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर जैसे पड़ोसी राज्यों की हवा को भी जहरीला बना देता है।
सबसे अधिक पराली जलाने के मामले अमृतसर जिले से सामने आए हैं, जिससे यह राज्य का सबसे प्रदूषित जिला बन गया है। इसके अलावा तरनतारन, पटियाला और फिरोजपुर में भी कई स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाएं।
सरकार ने कहा है कि पराली प्रबंधन के लिए मशीनों और तकनीकों पर सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही, जो किसान नियमों का उल्लंघन कर पराली जलाते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर पराली जलाने की घटनाएं इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच सकता है।















