मुजफ्फरनगर में विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय उर्वरक समिति एवं उर्वरक निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों को संतुलित एवं वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों के प्रयोग के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाए तथा जैविक और वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट तथा ढैंचा, सनई और लोबिया जैसी हरी खाद वाली फसलों को मिट्टी में मिलाने की सलाह दी। साथ ही राइजोबियम, एजोटोबेक्टर और पीएसबी जैसे जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी तय किया गया कि एक किसान को एक बार में अधिकतम सात बैग यूरिया और पांच बैग डीएपी ही उपलब्ध कराया जाएगा तथा उर्वरक वितरण किसान की जोत और फसल के अनुसार किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि किसानों को फसल चक्र अपनाने, दलहनी फसलों को शामिल करने और खेतों में विभिन्न फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने और उन्हें मिट्टी में मिलाकर कम्पोस्ट खाद के रूप में उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संतुलित उर्वरक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और किसानों की लागत कम होने के साथ लाभ में वृद्धि होती है।जिलाधिकारी ने उर्वरक विक्रेताओं को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार ही किसानों को उर्वरक वितरित किया जाए तथा सभी बिक्री का विवरण विक्रय पंजिका में दर्ज किया जाए। आगामी सत्र से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री में दर्ज भूमि के आधार पर ही उर्वरक दिया जाएगा। जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हुई है, उन्हें रजिस्ट्री कराने में विक्रेता सहयोग करेंगे।
बैठक में जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि कोई कंपनी, थोक या खुदरा विक्रेता उर्वरक वितरण में अनियमितता, टैगिंग या कालाबाजारी में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ 3/7 के साथ एनएसए और ब्लैक मार्केटिंग एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण, जिला कृषि अधिकारी, सहकारिता, गन्ना एवं उद्यान विभाग के अधिकारी, इफको, कृभको, चंबल फर्टिलाइजर सहित विभिन्न उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि और विक्रेता मौजूद रहे।























































