हर दिन नहाना जरूरी नहीं! स्किन एक्सपर्ट्स ने बताया नया ट्रेंड, जानें क्या है सही तरीका

पारंपरिक तौर पर यह माना जाता रहा है कि रोजाना नहाना शरीर की स्वच्छता और ताजगी के लिए जरूरी है। लेकिन हाल ही में स्किन एक्सपर्ट्स और डर्मेटोलॉजिस्ट्स ने एक नया ट्रेंड और वैज्ञानिक दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसके अनुसार हर दिन नहाना जरूरी नहीं है, बल्कि कुछ मामलों में यह त्वचा के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार साबुन और गर्म पानी से नहाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी और तेल कम हो जाते हैं, जिससे ड्राइनेस, खुजली और एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है।

डर्मेटोलॉजिस्ट्स बताते हैं कि मानव त्वचा पर मौजूद प्राकृतिक तेल और माइक्रोबायोम (बैक्टीरिया का संतुलित समूह) त्वचा को स्वस्थ और सुरक्षित रखते हैं। रोजाना इन पर असर डालने से त्वचा की सुरक्षा परत कमजोर हो सकती है। इसके अलावा, जिन लोगों का काम ऑफिस या घर के अंदर होता है, और जो ज्यादा पसीना नहीं बहाते, उनके लिए रोजाना नहाना अनिवार्य नहीं है। ऐसे लोग हफ्ते में 3-4 बार नहाकर भी साफ-सुथरे और स्वस्थ रह सकते हैं।

एक्सपर्ट्स यह भी स्पष्ट करते हैं कि नहाने की आवृत्ति जलवायु, शारीरिक गतिविधियों और व्यक्तिगत स्वच्छता आदतों पर निर्भर करती है। गर्म और आर्द्र इलाकों में रहने वाले, या खेल-कूद और मेहनत वाले काम करने वालों को रोज नहाना जरूरी हो सकता है। वहीं, ठंडे और शुष्क इलाकों में रहने वालों के लिए रोजाना नहाने की बजाय गुनगुने पानी से हल्की सफाई और जरूरत पड़ने पर केवल बगल, चेहरे और पैरों को धोना पर्याप्त है।

कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों ने भी इस विचार को समर्थन दिया है कि रोजाना नहाना त्वचा की नमी और पीएच बैलेंस को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नहाते समय ज्यादा गर्म पानी और हार्श केमिकल वाले साबुन से बचें, और नहाने के बाद मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करें।

इस नए ट्रेंड का उद्देश्य लोगों को नहाने की आदतों में संतुलन लाने, पानी की बचत करने और त्वचा को अनावश्यक नुकसान से बचाने के लिए जागरूक करना है। साफ-सफाई जरूरी है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इसका मतलब रोजाना पूरे शरीर को साबुन से धोना ही हो। सही देखभाल और सही समय पर नहाना ही त्वचा के लिए असली फायदेमंद तरीका है।

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