एक रिपोर्ट के मुताबिक, नूंह में वर्ष 2020 में पहली बार ब्रजमंडल यात्रा का आयोजन किया गया था और तब से यह वार्षिक धार्मिक यात्रा बन गई है। हालांकि, पिछले साल हुई हिंसा के बाद यह यात्रा काफी चर्चा में रही है। नूंह में लगभग 79 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, और इस इलाके में कई प्राचीन मंदिर हैं जो हिंदुओं की कम आबादी के कारण देखरेख की कमी से जूझ रहे हैं। ब्रजमंडल यात्रा का उद्देश्य है कि लोग इन मंदिरों से जुड़ें और उनका संरक्षण सुनिश्चित हो।
नूंह में क्यों होती है ब्रजमंडल यात्रा?
हरियाणा के नूंह जिले में ब्रजमंडल यात्रा साल में एक बार एक ही दिन होती है. बताया जाता है कि हिंदू संगठनों ने नूंह में स्थित प्राचीन हिंदू मंदिरों को बचाने के लिए कुछ ही साल पहले ये जलाभिषेक शुरू किया था. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां महाभारत काल के समय के तीन शिवलिंग भी हैं. इन मंदिरों से लोगों को जोड़ने के लिए हिंदू संगठनों ने कुछ ही साल पहले मेवात दर्शन यात्रा की शुरुआत की थी, इसे ही ब्रजमंडल यात्रा भी कहा जाता है. नल्हड़ शिव मंदिर से शुरू होने वाली यात्रा के लिए हरिद्वार से जल लाया जाता है और मंदिर में जलाभिषेक किया जाता है.















