मुजफ्फरनगर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य का दर्जा दिए जाने और देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग को लेकर शिवसेना ने एक बार फिर आंदोलनात्मक रुख अपनाया है। शिवसेना जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिवसेना कार्यकर्ता मौजूद रहे और दोनों मांगों को लेकर केंद्र सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई।ज्ञापन में बताया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 28 जनपद लंबे समय से विकास की दृष्टि से उपेक्षित हैं। संगठन का दावा है कि यह क्षेत्र प्रदेश के कुल राजस्व में लगभग 80 प्रतिशत का योगदान देता है, इसके बावजूद यहां के लोगों को न तो पर्याप्त विकास योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है और न ही युवाओं को रोजगार के समुचित अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। शिवसेना का कहना है कि संसाधन देने के बावजूद विकास से वंचित रहना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ अन्याय है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
शिवसेना ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जिसमें 75 जनपद शामिल हैं। इतने बड़े राज्य का प्रशासन प्रभावी ढंग से चलाना कठिन हो गया है। संगठन का कहना है कि उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली जैसे छोटे राज्यों के उदाहरण सामने हैं, जहां प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुचारू है और विकास की गति भी तेज है। इसी तर्ज पर यदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाया जाता है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास संभव होगा। साथ ही प्रशासन आम जनता के प्रति अधिक जवाबदेह बनेगा।ज्ञापन में देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की भी जोरदार मांग की गई। शिवसेना का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या देश के सीमित संसाधनों पर भारी दबाव बना रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। यदि समय रहते इस दिशा में सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाया गया, तो भविष्य में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।इस मौके पर प्रदेश उप प्रमुख प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग वर्षों से अलग राज्य की मांग कर रहे हैं। यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन विकास के मामले में लगातार पिछड़ रहा है। अलग राज्य बनने से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और सरकार को इस पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।शिवसेना ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने और जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने जैसे अहम मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेकर जनहित में ठोस कदम उठाए जाएं। इस अवसर पर प्रमोद अग्रवाल, शरद कपूर, चेतन देव, सूरज साठी, दविंदर चौहान, निकुंज चौहान, उज्ज्वल पंडित, साकेत पिंकू, शुभम बाल्मीकि, रोशन कुमार, योगिंदर सैनी, राकेश प्रजापति, गुड्डू, संजय नमन, त्यागी, रितेश सहित शिवसेना के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।















