मुजफ्फरनगर। पुलिस लाइन स्थित मंदिर परिसर में पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ की अध्यक्षता में सैनिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में उन्होंने प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों की व्यक्तिगत एवं विभागीय समस्याओं को विस्तार से सुना और उनके शीघ्र निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सम्मेलन की शुरुआत में इन्दु सिद्धार्थ ने विगत सैनिक सम्मेलन में उठाई गई समस्याओं के निस्तारण की स्थिति की जानकारी प्रतिसार निरीक्षक ऊदल सिंह से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों से संवाद स्थापित करते हुए उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान, ईमानदार और अनुशासित रहने की प्रेरणा दी।
पुलिस अधीक्षक अपराध ने कहा कि पुलिस बल समाज की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की रीढ़ है, इसलिए प्रत्येक पुलिसकर्मी का दायित्व है कि वह जनता की सेवा भावना के साथ अपने कार्यों का निर्वहन करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुशासन पुलिस बल की पहचान है और हर सदस्य को अपने व्यवहार और कार्यशैली से विभाग की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।
सम्मेलन के दौरान प्रशिक्षु आरक्षियों के बीच प्रशिक्षण संबंधी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षियों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में योगेन्द्र कुमार आर्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, गौरव कुमार द्वितीय स्थान पर रहे, जबकि भानु प्रताप सिंह तृतीय स्थान पर रहे। तीनों को इन्दु सिद्धार्थ ने स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अपराध ने पुलिसकर्मियों को साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय भी बताए। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए प्रत्येक पुलिसकर्मी को इसके प्रति जागरूक रहना चाहिए और आम जनता को भी इसके बारे में शिक्षित करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया के जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि “पुलिस बल एक अनुशासित संगठन है, अतः कोई भी ऐसा कार्य न करें जिससे विभाग की छवि पर आंच आए।”
कार्यक्रम में प्रतिसार निरीक्षक ऊदल सिंह सहित पुलिस के अन्य अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सम्मेलन का समापन प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों के उत्साहवर्धन और विभागीय एकजुटता के संदेश के साथ किया गया। इन्दु सिद्धार्थ द्वारा आयोजित यह सैनिक सम्मेलन न केवल प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों के मनोबल को ऊंचा उठाने वाला साबित हुआ, बल्कि इसमें अनुशासन, ईमानदारी और सेवा भावना के मूल मंत्र को भी पुनः सुदृढ़ किया गया।















