UAE में रूस-यूक्रेन पहली बार कर रहे मीटिंग,

अब्बू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता शुक्रवार को शुरू हुई. रूस ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए पूर्वी डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेनाओं की वापसी की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा.रूस और यूक्रेन का युद्ध लगभग चार साल पहले शुरू हुआ था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से समर्थित शांति योजना पर रूस और यूक्रेन के बीच पहली आमने-सामने की बातचीत है. संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि ये चर्चा दो दिनों तक चलेगी और इसका उद्देश्य ‘संवाद को बढ़ावा देना और संकट का राजनीतिक समाधान खोजना’ है.

यूक्रेन को क्या है डर?

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि क्षेत्रीय मुद्दा वार्ता का मुख्य विषय होगा. उन्होंने कहा कि डोनबास एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और यह चर्चा एक महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि इसका परिणाम अभी अनिश्चित है. उन्होंने उम्मीद जताई कि वार्ता युद्ध की समाप्ति की ओर अग्रसर होगी, लेकिन इस बात का डर भी जताया कि इस प्रक्रिया में बाधाएं आ सकती हैं. UAE में ये वार्ताएं ट्रंप की दावोस में जेलेंस्की से मुलाकात और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की ओर से रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद हो रही हैं.

रूस ने अपना पुराना राग अलापा

नए राजनयिक प्रयासों के बावजूद, क्रेमलिन ने डोनबास पर अपने पुराने रुख को दोहराया. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस का रुख वही है, यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र छोड़ना होगा, यह एक महत्वपूर्ण शर्त है. यूक्रेन, जो अभी भी डोनबास क्षेत्र के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखता है, ने इस शर्त को बार-बार अस्वीकार किया है. यूक्रेन के सहयोगी जर्मनी ने कहा कि उसे मॉस्को की समझौता करने की इच्छा पर अभी भी गंभीर सवाल हैं.

बातचीत के लिए कौन-कौन पहुंचा?

अबू धाबी में यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव कर रहे हैं और इसमें वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं. रूस की ओर से सैन्य प्रतिनिधिमंडल भेजा जा रहा है, जिसमें GRU खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव भी शामिल हैं. वहीं, आर्थिक दूत किरिल दिमित्रीव के अमेरिकी अधिकारियों के साथ अलग से बातचीत करने की उम्मीद है.

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