सड़कें, पुल और लोगों की संपत्तियां हुईं तबाह, सीएम धामी ने ली बैठक

सीएम धामी आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति का जायजा लिया।सहस्त्रधारा के ऊपरी इलाके में झील टूटने की अफवाह फैलने के बाद लोगों में दहशत और अफरा-तफरी मच गई।

सोमवार-मंगलवार की रात दो बार बादल फटने के बाद दिन में जब यह अफवाह उड़ी तो लोग अपनी जान बचाने के लिए दौड़ने लगे। दुकानदार और स्थानीय लोग अपनी दुकानों और घरों को बंद कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। क्षेत्रीय दुकानदार अरविंद पंवार और जितेंद्र रमोला ने बताया कि अफवाह फैली कि ऊपर की तरफ बनी झील टूट गई है और सारा पानी तेजी से नीचे की ओर आ रहा है। इस डर से सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे। सहस्त्रधारा में बादल फटने के बाद पहले ही तबाही का मंजर था और इस अफवाह ने लोगों के डर को और बढ़ा दिया।

लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने कहा, देहरादून एवं आसपास के क्षेत्रों में नदियों के उफान पर आने से 20 से 30 सड़कों और कुछ स्थानों पर पुलों को नुकसान हुआ है। कुछ संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट गए हैं। विभाग की ओर से सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है।

सहस्रधारा, कार्लीगाड़ और मजाड़ा में आई आपदा के बाद इस क्षेत्र में पांच होटलों को राहत शिविर के रूप में अधिग्रहित किया गया है। इसके लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने मंगलवार को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत आदेश जारी कर दिया है। जिलाधिकारी ने बताया कि ये सभी होटल अग्रिम आदेशों तक प्रशासन के अधिकार में रहेंगे। यहां पर साफ-सफाई से लेकर अन्य व्यवस्थाओं को पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। इन होटलों में प्रशासन की ओर से दो-दो कार्मिकों को भी तैनात कर दिया गया है। इन होटलों में प्रभावितों को ठहराया जाएगा। इसके अलावा अन्य कामकाज भी इन्हीं होटलों में किए जाएंगे।

ये हैं होटल
होटल वाइब्स इन-डांडा नूरीवाला सहस्रधारा
होटल आइस बर्ग-सहस्रधारा रोड
हेली रिजॉर्ट एंड रेस्टोरेंट-दून मसूरी बाईपास रोड
होटल हिल व्यू-कुल्हान मानसिंह, सहस्रधारा रोड
होटल पर्ल इन – शिप्रा विहार, कैनाल रोड

गुच्चुपानी के दुकानदारों ने बताया कि गुच्चुपानी में पर्यटक सीजन जैसे ही शुरु होता है उसी दौरान वहां पर विभाग की टीम आती है। हर साल 10 प्रतिशत टैक्स बढ़ा दिया जाता है लेकिन सुविधा के नाम पर उनको कुछ नहीं दिया जाता। दुकानदारों ने बताया कि दुकानों और नदी के बीच एक मजबूत पुश्ता बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन नहीं बनाया। इसके अलावा गर्मी में यहां पर पानी कम हो जाता है। ऐसे में पानी रोककर छोड़ने की व्यवस्था करने की भी गुहार कई बार लगाई गई।

बारिश के चलते पुल और सड़कों के टूटने से एक हजार से अधिक लोग अलग-अलग जगह फंसे हुए थे। इन्हें एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने रेस्क्यू कर बाहर निकाला। इनमें सिंघनीवाला में एक, मसंदावाला में 04, ठाकुरपुर में 01, सहस्रधारा रोड पर 04, हेरिटेज होटल मसूरी में 08, लिटिल हैवन होटल मसूरी में 15, पंचकूली रायपुर में 30, डालनवाला एमडीडीए कॉलोनी क्षेत्र में 20, सेरकी में 06, देवभूमि इंस्टीट्यूट पौंधा में 500 और परवल प्रेमनगर में 10 लोगों के फंसे होने की सूचना पुलिस व आपदा कंट्रोल रूम को मिली थी।

भारी बारिश के कारण टोंस नदी पुल के पास सड़क बह गई है। जिससे देहरादून-पांवटा राजमार्ग पर यातायात बंद हो गया है।फुलेट गांव में एक मकान गिर गया। बताया जा रहा है कि उसमें आठ मजदूर दब गए हैं। दो को स्थानीय लोगों ने निकाल लिया है। यह गांव शहर से करीब 18 किमी ऊंचाई पर है। यहां पैदल चढ़ाई कर जाने में टीमों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।

देहरादून में बादल फटने की घटना ने तबाही मचा दी है। आपदा में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ लोग लापता बताए जा रहे हैं। तेज़ बारिश और अचानक बढ़े जलस्तर से आसन नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के इलाके जलमग्न हो गए। हालात इतने गंभीर थे कि देहरादून के ठाकुरपुर में कई लोगों ने जान बचाने के लिए बिजली के खंभों और ऊंची जगहों पर चढ़कर शरण ली। एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभाला और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी है।

मसूरी देहरादून मार्ग बंद होने से सड़क में बीच-बीच में कई जगह वाहन फंसे हैं। पुलिस लगातार अनाउंस कर लोगों से मसूरी-दून मार्ग में यात्रा नहीं करने की अपील कर रही है।

बारिश के चलते प्रेमनगर में नंदा की चौकी पुल के बीच का हिस्सा ढह गया। इससे प्रेमनगर से विकासनगर, सेलाकुई समेत अन्य जगह जाने का संपर्क मार्ग भी कट गया।

भारी बारिश के कारण लालतप्पड़ क्षेत्र में भी काफी नुकसान हुआ है। थानों और भोगपुर की पहाड़ियों में हुईं भारी बारिश के कारण जाखन नदी में उफान आ गया। जिससे बड़कोट और थानों वन रेंज से दर्जनों बड़े पेड़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लालतप्पड़ जाखन पुल के नीचे फंस गए। जिससे बाढ़ का पानी ओवरफ्लो होकर पुल के ऊपर से बहने लगा। दर्जनों लोगों के घरों में भी घुस गया। वहीं कई खेत भारी कीचड़ से भर गए। पुल के पास स्थित देवी के मन्दिर परिसर में कीचड़ भर गया। पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर दोनों तरफ के ट्रैफिक को रुकवाया।

 

 

बारिश के बाद उपजे हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के समय यात्रा न करने की सलाह दी है। भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहने के लिए कहा गया। झुग्गियों में रह रहे लोगों से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने और किसी भी आपदा की सूचना तत्काल पुलिस या प्रशासन को देने के अपील की गई।

 

कर्णप्रयाग और गौचर में बदरीनाथ हाईवे बोल्डर गिरने से बंद हैं। वहीं श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुई है। खतरे का स्तर पार करने की आशंका है।

डोईवाला के जखन नदी पर बना पुल का एक हिस्सा टूटकर बह गया है। मार्ग पूरी तरह से बंद रखा जा रहा है।

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