राज्यसभा चुनाव: MVA में खींचतान, बैठकों के बाद भी नहीं बनी सहमति,

महाराष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा की एक सीट ने महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर खींचतान तेज कर दी है। सात में से एक सीट पर दावे को लेकर सहयोगी दल आमने-सामने हैं, जिससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। चुनाव नजदीक आते ही सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है और लगातार बैठकों के बावजूद सहमति बनती नहीं दिख रही।गुरुवार को कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेताओं के बीच लंबी बैठक हुई, लेकिन नतीजा बेनतीजा रहा। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ, नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार और सतेज पाटील मौजूद थे, जबकि राष्ट्रवादी गुट की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और जयंत पाटील ने बातचीत की कमान संभाली। चर्चा का केंद्र वही एक सीट रही, जिस पर दोनों दल अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं।

कांग्रेस का तर्क साफ है—2022 में MVA की चार राज्यसभा सीटों में से दो सीटें राष्ट्रवादी गुट को मिली थीं, इसलिए इस बार संतुलन के आधार पर सीट कांग्रेस के हिस्से में आनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने बैठक में दो-टूक कहा कि इस बार किसी भी हालत में यह सीट पार्टी को मिलनी चाहिए।

दूसरी ओर, राष्ट्रवादी गुट इस सीट को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा। पार्टी के भीतर यह चर्चा है कि शरद पवार एक बार फिर राज्यसभा जाना चाहें तो सीट उनके लिए सुरक्षित रखी जानी चाहिए। हालांकि कांग्रेस ने सीधे सवाल उठाया कि क्या पवार ने खुद ऐसी इच्छा जाहिर की है? जवाब में बताया गया कि सुप्रिया सुळे ने यह इच्छा व्यक्त की है, लेकिन पवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान अब तक सामने नहीं आया। यही चुप्पी तस्वीर को और उलझा रही है। सूत्रों का कहना है कि अगर पवार स्वयं सार्वजनिक रूप से राज्यसभा जाने की इच्छा जताते हैं, तो कांग्रेस सम्मानजनक समाधान पर विचार कर सकती है।इसी बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की एंट्री ने समीकरण और पेचीदा कर दिए हैं। गठबंधन में सबसे ज्यादा विधायक होने के आधार पर उद्धव गुट भी इस सीट पर दावा जता रहा है। पार्टी के नेता आदित्य ठाकरे ने संकेत दिए हैं कि संख्या बल के हिसाब से पहला अधिकार उनका बनता है। ऐसे में अब मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।सूत्रों के अनुसार हाल ही में शरद पवार, जयंत पाटील, शशिकांत शिंदे और जितेंद्र आव्हाड के बीच भी राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि पवार ने अंतिम निर्णय का गेंद महाविकास आघाड़ी के पाले में डाल दिया है और सहयोगी दलों से आपसी सहमति बनाने को कहा है।बैठकों का सिलसिला जारी है, लेकिन फिलहाल समाधान दूर नजर आ रहा है। एक सीट पर यह रस्साकशी आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत को और गरमा सकती है।

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