रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारतीय नागरिकों के लिए हालात अत्यंत गंभीर होते जा रहे हैं। बिनिल टीबी की दुखद मृत्यु और उनके साथी जैन टीके के गंभीर रूप से घायल होने के बाद यह स्थिति और भी स्पष्ट हो गई है। कई भारतीय नागरिक, जो पहले सपोर्ट स्टाफ के रूप में रूस गए थे, अब युद्ध के मैदान में फंसे हुए हैं और उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा या सहायता नहीं मिल रही है। यह मामले भारतीय दूतावास की सीमित भूमिका और रूस के साथ भारतीय नागरिकों के संबंधों में गंभीरता को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान किए गए वादे के बावजूद, यूक्रेन में लड़ रहे भारतीय नागरिकों की वापसी अभी तक संभव नहीं हो पाई है। रूस की ओर से उठाए गए कदमों और चेतावनियों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। युद्ध में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी वापसी सुनिश्चित करना भारतीय सरकार और दूतावास के लिए एक चुनौती बन चुका है।यह घटनाएं भारत और रूस के संबंधों, युद्ध में भारतीय नागरिकों की भूमिका और विदेश नीति के मसलों पर सवाल उठाती हैं।















