वक्फ संशोधन विधेयक पर मुस्लिम संगठनों का विरोध, अल्पसंख्यक अधिकारों पर खतरे की आशंका

वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर मुसलमान संगठनों की चिंताएँ और विरोध इस संदर्भ में उठ रहे हैं कि यह विधेयक मुसलमानों के धार्मिक और सामाजिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। वक्फ संपत्तियों को प्रबंधित करने वाले इस विधेयक में किए जा रहे संशोधन, मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।जमीयत उलेमा ए हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) जैसे प्रमुख मुस्लिम संगठनों के नेताओं का मानना है कि यह विधेयक न केवल वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण को कमजोर कर सकता है, बल्कि अल्पसंख्यक अधिकारों को भी खतरे में डाल सकता है।सरकार और अल्पसंख्यक समुदाय के बीच इस विधेयक को लेकर चल रही चर्चा ने समाज में गहरे राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों को उभारा है।

हिंदू-मुसलमान को लड़ाने की कोशिशः मदनी

जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि आजादी के बाद देश में पहली बार इस तरह के अजीबोगरीब हालात पैदा हुआ है. इस्लाम के ऊपर लगातार चोट की जा रही है. मदनी ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान हिंदू और मुसलमानों को लड़ाने की कोशिश हुई. बीजेपी की ये कोशिश नाकाम हो गई और इसकी वजह से उसे शिकस्त मिली. सिर्फ चुनाव के लिए नफरत पैदा किया जाए ये मुल्क के लिए खतरनाक है.

अरशद मदनी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि मुसलमानों के लिए यह बहुत खतरनाक स्थिति है. कांग्रेस ने जो कहा था कि हम हर मजहब को आजादी देंगे. पार्टी ने उस पर अमल किया है. मसला सिर्फ वक्फ का नहीं है बल्कि अकलियतों के अधिकार का है. उन्होंने कहा कि आज हुकूमत मुसलमानों के मजहब को महफूज नहीं रखना चाहती. हम पूरी ताकत के साथ इस विधेयक का विरोध करेंगे.

वक्फ संशोधन पर JPC की बैठक

दूसरी ओर, वक्फ (संशोधन) विधेयक पर जेपीसी की पहली बैठक आज गुरुवार को हुई जिसमें अल्पसंख्यक मामलों और कानून मंत्रालयों के अधिकारियों ने कानून में किए जा रहे कई संशोधनों के बारे में सदस्यों को जानकारी दी गई. संसद ने बीजेपी के लोकसभा सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली 31 सदस्यीय समिति को इस चर्चित विधेयक की जांच करने का काम सौंपा है. हालांकि कई विपक्षी दलों के साथ-साथ मुस्लिम संगठनों की ओर से इसका विरोध किया जा रहा है.

लोकसभा सचिवालय की ओर से कहा गया कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रतिनिधियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों पर जेपीसी को जानकारी देंगे. पाल ने कहा कि जेपीसी विधेयक पर विस्तार से चर्चा करेगी और इससे जुड़ी चिंताओं पर भी विचार-विमर्श करेगी.

उन्होंने यह भी कहा, “हम सभी 44 संशोधनों पर चर्चा करेंगे और अगले सत्र तक एक अच्छा और व्यापक विधेयक लाएंगे.” उन्होंने यह कहा कि जेपीसी अलग-अलग पंथों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई मुस्लिम संगठनों को बुलाएगी ताकि उनके विचार का जाना जा सकें.

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