पाकिस्तान: इमरान खान पर चलेगा देशद्रोह का मुकदमा?

पाकिस्तान की राजनीति में देशद्रोह एक ऐसा शब्द है जिसे जितनी बार बोला जाता है, उससे कहीं ज्यादा बार फुसफुसाकर इस्तेमाल किया जाता है. इमरान खान पर संभावित ‘ट्रेजन’ मुकदमे की चेतावनी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने खुले तौर पर दी है.

इमरान खान के बारे में कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ देशद्रोह का केस शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

इसके बाद इमरान खान की बहनों ने रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर डेरा डाल दिया. सैंकड़ों की तादाद में PTI कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर प्रदर्शन किया और इमरान खान को रिहा करने की मांग की. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की सेहत और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई.

सनाउल्लाह ने कहा कि इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के डायरेक्टर जनरल ने हाल ही में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो मैसेज दिया, वह साफ था. उन्होंने PTI नेताओं को चेतावनी दी कि वे इन बातों को हल्के में न लें, और आगाह किया कि ऐसा करने के “गंभीर नतीजे” हो सकते हैं.

सनाउल्लाह ने कहा कि इमरान खान के हालिया बयानों का लहजा और असलियत दिखाती है कि हालात बहुत गंभीर हो गए हैं. उनके खिलाफ देशद्रोह का केस चलाने का दरवाजा बंद नहीं हुआ है.

देशद्रोह की हर सत्ता परिवर्तन में उठी गूंज

सनाउल्लाह का बयान एक बड़े और पुराने खेल का संकेत सा है, जो पाकिस्तान की सत्ता, सैन्य प्रतिष्ठान और न्यायिक ढांचे के बीच दशकों से चलता आ रहा है. यह पहली बार नहीं है कि किसी पूर्व प्रधानमंत्री को देश-विरोधी कह कर घेरा जा रहा है. यह पैटर्न इतना नियमित है कि पाकिस्तान के इतिहास की हर सत्ता-परिवर्तन में इसकी गूंज सुनाई देती है.

इस बार मामला एक बयान जितना साधारण नहीं है. इमरान खान पहले से ही कई मामलों में जेल में हैं, उनकी पार्टी पीटीआई को चुनावी मैदान से काफी हद तक बाहर किया जा चुका है और सेना की आलोचना का हर संकेत “रेड लाइन” माना जा रहा है. राणा सनाउल्लाह, जो वजीर ए आजम शहबाज शरीफ के सलाहकार हैं.

उनका कहना है कि इमरान “रेड लाइन क्रॉस कर चुके हैं” (मतलब लक्ष्मण रेखा पार कर चुके हैं) और उन पर देशद्रोह का केस चल सकता है, उन गहरे तनावों की ओर इंगित करता है जिन पर पाकिस्तान की जनता को खुलकर जानकारी नहीं दी जाती. सूत्रों के अनुसार सेना के भीतर भी एक धड़ा इमरान के सार्वजनिक आरोपों (विशेषकर साइफर मामले के बाद लगाए गए) को एक संगठित दुष्प्रचार अभियान मानता है.

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