नगरपालिका सभागार में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर, मीनाक्षी स्वरूप ने किया एकता और समर्पण का आह्वान

मुजफ्फरनगर। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुक्रवार को नगर पालिका परिषद सभागार में एक भव्य एवं भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप रहीं। उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नगर के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रेरक उद्बोधन लाइव सुना। उद्बोधन के उपरांत सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का वाचन किया और तिरंगा लहराते हुए मातृभूमि के प्रति निष्ठा, समर्पण एवं गर्व की भावना व्यक्त की।

कार्यक्रम की शुरुआत में टाउनहाल स्थित पालिका सभागार में उपस्थित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने वंदे मातरम् की रचना के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि वंदे मातरम् की रचना 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जो बाद में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बन गई। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और आत्मगौरव का प्रतीक है। कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों, कविताओं और भाषणों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि वंदे मातरम् केवल भारत का राष्ट्रीय गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरक आत्मा है। यह गीत उस समय की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक था जब भारतवर्ष गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रथम उद्घोषणा के रूप में सामने आया, जिसने हमें यह स्मरण कराया कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं में बंधा देश नहीं, बल्कि एक जीवंत भू-सांस्कृतिक राष्ट्र है, जिसकी एकता उसकी संस्कृति और सभ्यता में निहित है।

उन्होंने आगे कहा कि वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हर देशवासी में मातृभूमि के प्रति गर्व, समर्पण और बलिदान की भावना जागृत की। 150 वर्षों से यह गीत राष्ट्रवाद, एकता और नवऊर्जा का प्रतीक बनकर हर पीढ़ी को प्रेरित करता आ रहा है। मीनाक्षी स्वरूप ने उपस्थित जनसमूह से आवाहन किया कि वे इस प्रेरणादायी गीत को अपने जीवन में आत्मसात करें और इसके पूर्ण संस्करण का सामूहिक गान कर इसकी गूंज आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।

कार्यक्रम के अंत में सभागार भारत माता की जय के उद्घोष से गूंज उठा। सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और नागरिकों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का पूर्ण वाचन किया तथा पालिका परिसर में तिरंगा फहराकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह, व्यापारी नेता शलभ गुप्ता, सहायक अभियंता नैपाल सिंह, लिपिक अशोक ढींगरा, आईटी प्रियेश सिंह, मैनपाल सिंह, संदीप यादव, नितिन कुमार, मनोज पाल, गोपीचंद वर्मा, निपुण कन्नौजिया, कैलाश नारायण, प्रवीण कुमार, सुनील कुमार और रूचि शर्मा सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।

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