मुजफ्फरनगर। उर्दू बेदारी फोरम मुजफ्फरनगर द्वारा एफडीआई इंटर कॉलेज बिलासपुर में एकदिवसीय उर्दू कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मदरसा फलाह दारैन के संस्थापक मौलाना मुमशाद कासमी ने की, जबकि संचालन उर्दू बेदारी फोरम के कोषाध्यक्ष मुहम्मद इरशाद ने किया। कार्यशाला की शुरुआत मुफ्ती अब्दुल सत्तार की तिलावत-ए-कुरान और डॉ. मुहम्मद ताहिर क़मर की नात-ए-रसूल से हुई। कार्यशाला प्रभारी मुहम्मद शाहवेज ने सभी निर्णायकों का परिचय कराया और कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
उर्दू बेदारी फोरम के अध्यक्ष शहजाद अली ने बताया कि यह कार्यशाला कक्षा नौ से स्नातक तक के उन छात्रों के लिए आयोजित की गई है जो उर्दू विषय का अध्ययन करते हैं। संस्था का उद्देश्य छात्रों के भाषाई और साहित्यिक कौशल को विकसित करना है। इस कार्यशाला में विद्यालय स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों का चयन जिला स्तर की प्रतियोगिता के लिए किया गया। प्रतिभागियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया था। पहले समूह (कक्षा 9-10) का विषय था ‘अल्लामा इक़बाल एक शायर और मुरब्बी के रूप में’, दूसरे समूह (कक्षा 11-12) का विषय था ‘अल्लामा इक़बाल का तसव्वुर-ए-शाहीन व अलम-ए-मुजफ्फरनगरी’, जबकि स्नातक वर्ग का विषय था ‘बाबा-ए-उर्दू मौलवी डॉ. अब्दुल हक़ का जीवन और सेवाएँ’। प्रत्येक प्रतिभागी को 2-3 मिनट का समय अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए दिया गया।
निर्णायक मंडल में उर्दू साहित्य के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें अब्दुल गफूर एडवोकेट, शकील अहमद एडवोकेट, डॉ. ताहिर क़मर और ज़ैनबिया गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या बिंते हसन ज़ैदी शामिल थीं। सभी निर्णायकों ने बच्चों के भाषणों का मूल्यांकन कर उन्हें प्रोत्साहित किया और सुधारात्मक सुझाव दिए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सम्मानित अतिथि अल-सारा तहरीक-ए-तालीम बागपत के अध्यक्ष इरफान अली असरवी ने कहा कि आज जब उर्दू भाषा को लेकर समाज में संवेदनशीलता घट रही है, ऐसे में उर्दू कार्यशालाएँ समय की ज़रूरत हैं। उन्होंने उर्दू बेदारी फोरम द्वारा मुजफ्फरनगर में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस्लामिया इंटर कॉलेज के प्रवक्ता काजी तनवीर आलम ने छात्रों से उर्दू विषय को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि यदि छात्र उच्च शिक्षा के साथ सिविल सेवा, पत्रकारिता या तकनीकी शिक्षा में निपुणता हासिल करें, तो उर्दू माध्यम से भी वे जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यशाला के समापन पर फोरम के महासचिव हाजी औसाफ अहमद अंसारी और एफडीआई इंटर कॉलेज के उप प्रबंधक मुहम्मद चौधरी ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। अध्यक्षीय संबोधन में मौलाना मुमशाद कासमी ने कहा कि उर्दू बेदारी फोरम द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने सभी विद्यालयों और कॉलेजों से आह्वान किया कि वे भी उर्दू को कामकाज की भाषा बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि घरों की नाम पट्टिकाएँ उर्दू में लिखी जानी चाहिए, जिससे भाषा को बढ़ावा मिले।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हाजी अबुल हसन, डॉ. रियाज़, मुहम्मद राशिद, ओवैस अहमद, वसीम अहमद और ज़मीर हसन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर गॉड ग्रेस इंटर कॉलेज के प्रबंधक साजिद त्यागी, मुहम्मद अफ़ज़ल, असमा मैडम, उज़मा महदी, मुहम्मद मुस्तफ़ा, फ़ुरक़ान तथा फ़लाह दारैन इस्लामिया इंटर कॉलेज के समस्त स्टाफ मौजूद रहे।















