इजराइल, ब्रिटेन से यूक्रेन तक…इस खतरनाक मिसाइल को क्यों खरीदना चाह रहे 19 देश?

पेंटागन ने 19 देशों के साथ 3.5 अरब डॉलर का समझौता किया है. ये अब तक सबसे बड़ा सौदा है जिसके तहत AIM-120 एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (AMRAAM) मिसाइल इन देशों को दिया जाएगा.

क्यों इस मिसाइलों को खरीदने की होड़ लगी है?

ये मिसाइलें अमेरिका के हर लड़ाकू विमान में फिट की जा सकती हैं, और ज्यादातर सहयोगी देशों के विमानों में भी. इन्हें बियॉन्ड-विजुअल-रेंज यानी आंखों की सीमा से परे के हवाई लक्ष्यों को मारने के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन ये NASAMS (नेशनल एडवांस्ड सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम) में जमीन से मार करने वाली मिसाइल की तरह भी इस्तेमाल हो रही हैं. NASAMS को नॉर्वे की कंपनी Kongsberg और Raytheon ने मिलकर बनाया है, फिलहाल अमेरिका को सुरक्षा देता है और दुनिया के एक दर्जन से ज्यादा देशों में तैनात है. यूक्रेन में इसे बीते तीन साल से युद्ध में इस्तेमाल किया गया है.

कई बड़े युद्ध में हो चुका इस्तेमाल

अमेरिका ने हूती विद्रोहियों के ड्रोन को गिराने, सीरिया और इराक में ड्रोन हमलों को नाकाम करने और ईरानी हमलों से इजराइल की रक्षा में इन मिसाइलों का जमकर इस्तेमाल किया. ये मिसाइल खराब मौसम से लेकर किसी भी वक्त मार करने में सक्षम है. इसकी गति 1,372 मीटर/सेकंड है. हाल ही में अमेरिका ने मिस्र को भी AMRAAM मिसाइल देने का फैसला किया है, जो पहले कभी उसे नहीं दी गई थीं. मिस्र के F-16 विमानों को अब तक AIM-7 स्पैरो और AIM-9 साइडवाइंडर जैसी कम क्षमतावाली मिसाइलों से ही काम चलाना पड़ता था.

स्टॉक में कमी इसलिए बढ़ रहा उत्पादन

AIM-120 मिसाइलों का निर्माण अब बहुत तेज़ी से बढ़ाने की जरूरत है. अब तक हजारों मिसाइलें बनाई जा चुकी हैं, लगभग 5,000 का परीक्षण हुआ है, लेकिन हाल के वर्षों में कई मोर्चों पर इनका अत्यधिक उपयोग हुआ है, जिससे स्टॉक कम हो गया है. अब भारी रकम खर्च की जा रही है ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे सैन्य अभियानों से मिसाइल स्टॉक लगातार खत्म हो रहे हैं.

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