वॉशिंगटन: डोनाल्ड ट्रंप के 18 मिनट के राष्ट्र के नाम संबोधन से कुछ बातें बिल्कुल साफ हो गई हैं। सबसे पहली बात ईरान युद्ध कम से कम 2-3 हफ्ते और चलेंगे। दूसरी बात होर्मुज स्ट्रेट संकट बरकरार रहने वाला है। कई लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप अपने संबोधन में अचानक युद्ध बंद करने का ऐलान कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनके भाषण में ईरान युद्ध की जटिलताएं दिखी हैं जिसमें अमेरिका के पैर बिल्कुल उलझ चुके हैं। ट्रंप की आंखों में वो अमेरिका का पैर फंसना साफ दिख रहा है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (अमेरिकी समय के मुताबिक 1 अप्रैल 2026) को कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका अपने लक्ष्यों को ‘पूरा करने के करीब’ है। उन्होंने इस संघर्ष में ‘जबरदस्त जीत’ हासिल करने के लिए अमेरिकी सेना की तारीफ की। डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका अगले 2-3 हफ्तों तक ईरान पर ‘बेहद जोरदार’ हमले करेगा। यानि ईरान युद्ध के फिलहाल खत्म होने के आसार नहीं है और भारत के ऊपर इसके गंभीर असर दिखते रहेंगे या हो सकता है कि आने वाले दिनों में असर का दिखना और ज्यादा हो जाए।
वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के भाषण की 10 बड़ी बातें
ईरान युद्ध लंबा खिंचेगा- डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध शुरू होने के बाद 4 से 5 हफ्ते युद्ध चलने की बात कही थी। लेकिन अब उन्होंने इसे 2-3 हफ्ते और बढ़ा दिया है। इस दौरान ईरान पर हमले और तेज किए जाएंगे। भारत के लिए इसका मतलब है कि कच्चे तेल की कीमतें और सप्लाई चेन में रुकावट अभी लंबे समय तक जारी रहेगी। गैस संकट भी बना रहेगा। जाहिर तौर पर ईरान इस दौरान खाड़ी देशों पर भी अपने हमले और तेज करेगा और ईरान हो सकता है अरब देशों के गैस और तेल संयंत्रों को और तेजी से निशाना बनाए।
ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ और अस्थिरता- डोनाल्ड ट्रंप ने चल रही बातचीत के बारे में बात की लेकिन उन्होंने कोई खास जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि ‘बातचीत जारी है लेकिन सत्ता परिवर्तन करना हमारा लक्ष्य नहीं था। हमने कभी सत्ता परिवर्तन की बात नहीं की लेकिन सत्ता परिवर्तन हो गया। उनके सभी मूल नेता मारे जा चुके हैं। वो सब मर चुके हैं।’ ट्रंप का ये बयान उनके पुराने बयानों से अलग है। उन्होंने कहा कि ‘नया समूह कम कट्टरपंथी और कहीं ज्यादा समझदार है।’लेकिन असल में ऐसा नहीं है। लेकिन इससे दो मतलब निकलते हैं। पहला- ईरानी सरकार गिरने से अभी बहुत दूर है। और दूसरी बात यह है कि बातचीत के लिए दरवाजा खुला है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप दूसरी तरफ के किसी भी मजबूत वार्ताकार की कभी बुराई नहीं करते, चाहे वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हों या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। ट्रंप की सबसे अच्छी बात ये है कि वो डील के लिए हमेशा खुले रहते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी एक छिपा हुआ दांव– ट्रंप ने ईरानी शासन को चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका उसके पावर ग्रिड पर हमला करने से नहीं हिचकिचाएगा। यह एक बहुत बड़ा कदम होगा, जिसे कई विशेषज्ञों ने ‘युद्ध अपराध’ बताया है क्योंकि इससे आम नागरिकों पर हमला होता है। पावर ग्रिड के ठप होने का मतलब होगा कि पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट काम नहीं करेंगे जिससे देश की आबादी प्यासी रह जाएगी।उन्होंने आगे कहा कि “फिर भी अगर इस दौरान कोई समझौता नहीं होता है तो हमारी नजरें कुछ खास ठिकानों पर हैं। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो हम उनके बिजली बनाने वाले हर एक प्लांट पर बहुत जोरदार हमला करेंगे, और शायद एक ही समय पर। हमने अभी तक उनके तेल ठिकानों पर हमला नहीं किया है हालांकि वह सबसे आसान निशाना है क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें बचने या दोबारा खड़े होने का जरा भी मौका नहीं मिलेगा।
ईरान के परमाणु ठिकाने- अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से 450 किलो एनरिच्ड यूरेनियन निकालने पर भी बात की जो वहां छिपाकर रखा गया है। रिपोर्ट्स हैं कि अमेरिकी सेना उसे निकालने के लिए ईरान में कदम रख सकती है। ट्रंप ने हजारों यूएस मरीन कमांडो को मिडिल ईस्ट रवाना किया है। ये जमीनी अभियान होगा जो सबसे ज्यादा जोखिम भरा होगा।ट्रंप ने कहा “जिन परमाणु ठिकानों को हमने B2 बमवर्षकों से तबाह कर दिया था उन पर इतनी जोरदार मार की गई है कि परमाणु धूल के पास जाने में ही महीनों लग जाएंगे और हमने उन्हें कड़ी सैटेलाइट निगरानी और नियंत्रण में रखा हुआ है।” उन्होंने अपनी बात का रुख बदलते हुए कहा है कि वे ठिकाने अब मलबे में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने इसे “परमाणु धूल” का नाम दिया और ईरानियों को कोई हरकत नहीं करने को कहा है क्योंकि अमेरिका अपने सैटेलाइट्स के जरिए उन पर लगातार नजर रखे हुए है।
ट्रंप के भाषण का भारत के लिए क्या मायने हैं?
कुल मिलाकर बात ये है कि भारत को एक लंबे संघर्ष को ध्यान में रखते हुए कमर कस लेनी चाहिए। भारत को एक लंबी लड़ाई को देखते रहने और उसके नतीजे को झेलने के लिए तैयार रहना होगा। ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।ट्रंप के भाषण से ठीक पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी लोगों के नाम एक खत जारी किया जिसमें उन्होंने कहा “आज दुनिया एक चौराहे पर खड़ी है। टकराव के रास्ते पर चलते रहना पहले से कहीं ज्यादा महंगा और बेकार है। टकराव और बातचीत के बीच चुनाव करना एक असली और अहम फैसला है। इसका नतीजा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा। अपने हजारों साल के गौरवशाली इतिहास में ईरान ने कई हमलावरों का सामना किया है। उन सभी के नाम इतिहास में बस दागदार नामों के तौर पर रह गए हैं जबकि ईरान आज भी कायम है। मजबूत, गरिमापूर्ण और गौरवशाली।” यानि सौ बात की एक बात है कि संघर्ष जारी रहेगा और आने वाले वक्त में मुश्किलों को संभालने के लिए कूटनीतिक माथापच्ची जारी रहेगी















