ईरान ने तेल संकट के बीच भारत को दिया ऑफर,

ईरान और अमेरिका (Iran-America War) के बीच जंग के चलते कच्चे तेल (Crude Prices) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, और भारत जैसे देश के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द है। क्योंकि हम अपनी जरुरतों का 80 फीसदी तेल आयात करते हैं।इस बीच कच्चे तेल पर ईरान की ओर से भारत को एक ऑफर मिला है, लेकिन इसके लिए तेहरान ने कीमत और पेमेंट पर मनमानी शर्तें रखी हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत के तीन सूत्रों ने बताया कि अमेरिका द्वारा युद्ध के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट को कम करने के लिए ईरान पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने के बाद, तेहरान के व्यापारियों ने भारतीय रिफाइनरियों को ICE ब्रेंट की तुलना में प्रीमियम पर ईरानी ऑयल ऑफर किया है यानी कच्चे तेल की सामान्य कीमतों से ज्यादा भाव पर ईरान अपना तेल देगा।

भारत ने मई 2019 के बाद से तेहरान से तेल की कोई खेप प्राप्त नहीं की है, क्योंकि अमेरिका के दबाव में आकर उसने ईरानी कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी।

सूत्रों ने और क्या बताया?

सूत्रों के अनुसार, भारत के निकट स्थित ईरान से तेल और लिक्विवड पेट्रोलियम गैस की अधिकतम खरीद के लिए भारतीय रिफाइनरों के पास एक महीने का समय है। तेल की कीमतों में उछाल को रोकने के प्रयास में अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने के बाद भारतीय रिफाइनर पहले ही लाखों बैरल रूसी तेल खरीद चुके हैं।

सूत्रों के अनुसार, व्यापारी और नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी डॉलर में भुगतान की मांग कर रहे हैं, और कुछ पक्ष भारतीय रुपये में भी भुगतान स्वीकार करने को तैयार हैं। सूत्रों ने बताया कि ईरानी तेल की पेशकश ICE ब्रेंट की तुलना में 6-8 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर की गई है, और माल पहुंचने के सात दिनों के भीतर भुगतान किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने सोमवार को कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट 1970 के दशक के दो तेल संकटों से कहीं अधिक गंभीर है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद पर 30 दिनों के लिए प्रतिबंध हटा दिए हैं।

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