मुजफ्फरनगर। विकासखंड सदर में मिलेट्स पुनरुद्धार योजना के अंतर्गत कृषक जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख अमित चौधरी ने की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मोटे अनाजों की खेती, उनके पोषण संबंधी लाभ और आर्थिक महत्व के बारे में जागरूक करना रहा।
प्रशिक्षण सत्र में उपकृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने किसानों को मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, सावा, रामदाना, चीना और कंगनी के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मोटे अनाज न केवल पोषण का बेहतर स्रोत हैं बल्कि बदलते मौसम और कम पानी में भी आसानी से उगाए जा सकते हैं। इसके चलते ये अनाज किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी पारंपरिक खेती के साथ-साथ मोटे अनाज की खेती को भी प्राथमिकता दें ताकि स्वास्थ्य और आय दोनों में संतुलन कायम हो सके।
कार्यक्रम के दौरान विभाग की अन्य योजनाओं की भी जानकारी दी गई। गन्ना विभाग के अधिकारियों ने किसानों को गन्ने की उन्नत किस्मों और उसकी वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से अवगत कराया। वहीं पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को पशुधन पालन, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और रोगों से बचाव के उपायों के बारे में बताया गया। उद्यान विभाग ने फल-सब्जियों की खेती और आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी दी, जिससे किसान अपनी आय में विविधता ला सकें।
कृषि विज्ञान केंद्र से आई वैज्ञानिक रीना ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक ज्ञान के साथ वैज्ञानिक विधियों को भी अपनाना चाहिए, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा।
इस मौके पर जिला उद्यान अधिकारी अवनीश श्रीवास्तव, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कृषक मानसिंह, सत्य प्रकाश, फुरकान, मनोज, विजय सहित कई किसान भी प्रशिक्षण में शामिल हुए और अधिकारियों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम में किसानों ने विभागीय योजनाओं की जानकारी लेने के साथ-साथ मोटे अनाजों की खेती को अपनाने में रुचि दिखाई। इस प्रशिक्षण से किसानों को खेती में विविधता लाने, फसल उत्पादन बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत होने के नए रास्ते मिले। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि ऐसे कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को बल मिलेगा और मोटे अनाजों की खेती फिर से आमजन के जीवन में अपनी जगह बनाएगी।















